
कानपुर, 02 जून। कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के कॉरिडोर-2 (सीएसए से बर्रा-8) के एलिवेटेड सेक्शन में रेल पटरियों की वेल्डिंग और बिछाने का कार्य शुरू हो गया है। इससे परियोजना के निर्माण कार्य को नई गति मिली है।
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि कॉरिडोर-2 के निर्माणाधीन लगभग 4.50 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड सेक्शन (कृषि विश्वविद्यालय-बर्रा-8) में ट्रैक निर्माण की प्रक्रिया के तहत रेल पटरियों की वेल्डिंग और लेइंग (बिछाने) का कार्य आरंभ कर दिया गया है। इससे पहले 4.10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन (रावतपुर-डबल पुलिया) में ट्रैक निर्माण का कार्य पहले से जारी है।
उन्होंने बताया कि एलिवेटेड सेक्शन में सबसे पहले विजय नगर स्टेशन के निकट मेट्रो वायाडक्ट पर रेल पटरियों की वेल्डिंग और बिछाने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए फ्लैश बट वेल्डिंग (एफबीडब्ल्यू) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। वेल्डिंग के बाद विशेष उपकरणों की सहायता से पटरियों को वायाडक्ट पर स्थापित किया जा रहा है।
यूपीएमआरसी के डायरेक्टर (वर्क्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर) सी.पी. सिंह तथा डायरेक्टर (रोलिंग स्टॉक) नवीन कुमार ने कॉरिडोर-1 और कॉरिडोर-2 के निर्माणाधीन स्टेशनों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कानपुर सेंट्रल, झकरकटी, ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशन, कॉरिडोर-2 डिपो तथा अन्य निर्माणाधीन स्टेशनों का दौरा किया।
अधिकारियों ने बताया कि आगामी चरण में बैलेस्ट-लेस (गिट्टी रहित) ट्रैक के लिए ट्रैक स्लैब की ढलाई, रेल पटरियों को स्थायी रूप से फिक्स करने तथा सुरक्षा के लिए डिरेलमेंट गार्ड और विद्युत आपूर्ति हेतु थर्ड रेल लगाने का कार्य किया जाएगा।
यूपीएमआरसी के अनुसार कानपुर मेट्रो में ‘हेड हार्डेंड’ तकनीक से निर्मित विशेष रेल पटरियों का उपयोग किया जा रहा है। इनका उपयोग सामान्यतः हाई-स्पीड फ्रेट कॉरिडोर में किया जाता है। बैलेस्ट-लेस ट्रैक की विशेषता यह है कि इसमें रखरखाव की आवश्यकता कम होती है और इसकी आयु अधिक होती है।
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि कॉरिडोर-2 के एलिवेटेड सेक्शन में ट्रैक निर्माण की शुरुआत परियोजना की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर-2 के अंडरग्राउंड सेक्शन में भी ट्रैक निर्माण तेजी से चल रहा है और कॉरिडोर-1 के शेष भाग तथा कॉरिडोर-2 दोनों में कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि लगभग 23.50 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर-1 (आईआईटी-नौबस्ता) के तहत कानपुर मेट्रो की यात्री सेवाएं आईआईटी से कानपुर सेंट्रल तक लगभग 15 किलोमीटर मार्ग पर संचालित हो रही हैं। वहीं कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक के शेष सेक्शन में परीक्षण कार्य जारी है। इसके अलावा 8.60 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर-2 (सीएसए-बर्रा-8) का सिविल निर्माण कार्य भी तेजी से प्रगति पर हैउत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि कॉरिडोर-2 के निर्माणाधीन लगभग 4.50 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड सेक्शन (कृषि विश्वविद्यालय-बर्रा-8) में ट्रैक निर्माण की प्रक्रिया के तहत रेल पटरियों की वेल्डिंग और लेइंग (बिछाने) का कार्य आरंभ कर दिया गया है। इससे पहले 4.10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन (रावतपुर-डबल पुलिया) में ट्रैक निर्माण का कार्य पहले से जारी है।
उन्होंने बताया कि एलिवेटेड सेक्शन में सबसे पहले विजय नगर स्टेशन के निकट मेट्रो वायाडक्ट पर रेल पटरियों की वेल्डिंग और बिछाने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए फ्लैश बट वेल्डिंग (एफबीडब्ल्यू) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। वेल्डिंग के बाद विशेष उपकरणों की सहायता से पटरियों को वायाडक्ट पर स्थापित किया जा रहा है।
यूपीएमआरसी के डायरेक्टर (वर्क्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर) सी.पी. सिंह तथा डायरेक्टर (रोलिंग स्टॉक) नवीन कुमार ने कॉरिडोर-1 और कॉरिडोर-2 के निर्माणाधीन स्टेशनों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कानपुर सेंट्रल, झकरकटी, ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशन, कॉरिडोर-2 डिपो तथा अन्य निर्माणाधीन स्टेशनों का दौरा किया।
अधिकारियों ने बताया कि आगामी चरण में बैलेस्ट-लेस (गिट्टी रहित) ट्रैक के लिए ट्रैक स्लैब की ढलाई, रेल पटरियों को स्थायी रूप से फिक्स करने तथा सुरक्षा के लिए डिरेलमेंट गार्ड और विद्युत आपूर्ति हेतु थर्ड रेल लगाने का कार्य किया जाएगा।
यूपीएमआरसी के अनुसार कानपुर मेट्रो में ‘हेड हार्डेंड’ तकनीक से निर्मित विशेष रेल पटरियों का उपयोग किया जा रहा है। इनका उपयोग सामान्यतः हाई-स्पीड फ्रेट कॉरिडोर में किया जाता है। बैलेस्ट-लेस ट्रैक की विशेषता यह है कि इसमें रखरखाव की आवश्यकता कम होती है और इसकी आयु अधिक होती है।
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि कॉरिडोर-2 के एलिवेटेड सेक्शन में ट्रैक निर्माण की शुरुआत परियोजना की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर-2 के अंडरग्राउंड सेक्शन में भी ट्रैक निर्माण तेजी से चल रहा है और कॉरिडोर-1 के शेष भाग तथा कॉरिडोर-2 दोनों में कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि लगभग 23.50 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर-1 (आईआईटी-नौबस्ता) के तहत कानपुर मेट्रो की यात्री सेवाएं आईआईटी से कानपुर सेंट्रल तक लगभग 15 किलोमीटर मार्ग पर संचालित हो रही हैं। वहीं कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक के शेष सेक्शन में परीक्षण कार्य जारी है। इसके अलावा 8.60 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर-2 (सीएसए-बर्रा-8) का सिविल निर्माण कार्य भी तेजी से प्रगति पर है