परिवारवाद के कारण क्षेत्रीय दलों में बढ़ रही टूट: भाजपा

परिवारवाद के कारण क्षेत्रीय दलों में बढ़ रही टूट: भाजपा

कानपुर, 3 जून । उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के अध्यक्ष प्रकाश पाल ने क्षेत्रीय दलों में बढ़ती राजनीतिक टूट का कारण परिवारवाद और वंशवादी राजनीति को बताते हुए कहा है कि लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधि अब ऐसी राजनीतिक व्यवस्था को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, जहां निर्णय कुछ व्यक्तियों या परिवारों तक सीमित हों।श्री पाल ने बुधवार को यहां जारी बयान में कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कई विधायकों के असंतोष की खबरें इस बात का संकेत हैं कि लोकतांत्रिक राजनीति में व्यक्तिगत एवं पारिवारिक वर्चस्व को लंबे समय तक बनाए रखना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संगठन, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधियों की भूमिका सर्वोपरि होती है, जबकि परिवारवादी दलों में निर्णय प्रक्रिया सीमित दायरे में सिमट जाती है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में हुए राजनीतिक घटनाक्रम भी इसी प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, संगठन आधारित राजनीति और लोकतांत्रिक मूल्यों को महत्व देने वाले नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने अलग राह चुनकर अपनी राजनीतिक दिशा निर्धारित की।भाजपा नेता ने दावा किया कि देश की जनता और राजनीतिक कार्यकर्ता अब वंशवाद एवं परिवारवाद की राजनीति से ऊब चुके हैं और संगठन आधारित, लोकतांत्रिक तथा कार्यकर्ता-केंद्रित नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इसका उदाहरण है, जहां एक सामान्य कार्यकर्ता भी अपनी क्षमता और परिश्रम के बल पर शीर्ष पदों तक पहुंच सकता है।

श्री पाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी परिवारवाद पर आधारित राजनीति करने वाले दलों को भविष्य में इसी प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक सोच रखने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं में परिवार-केंद्रित राजनीतिक व्यवस्था को लेकर असंतोष बढ़ रहा है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में राजनीतिक परिदृश्य पर दिखाई दे सकता है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की इच्छा सर्वोच्च होती है और जो दल संगठनात्मक लोकतंत्र की अपेक्षा परिवार विशेष के हितों को प्राथमिकता देते हैं, उन्हें राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनके अनुसार, देश की राजनीति अब विकास, सुशासन और संगठनात्मक लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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