
कानपुर देहात, 3 जून । उत्तर प्रदेश में सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा तथा अनियमितताओं के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत कानपुर देहात के भोगनीपुर भूमि प्रकरण में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। मंडलायुक्त कानपुर के. विजयेन्द्र पांडियन ने वर्ष 2011 में थर्मल पावर परियोजना के लिए आवंटित लगभग 761.41 एकड़ भूमि का आवंटन निरस्त करते हुए उसे पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भोगनीपुर क्षेत्र में थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने के उद्देश्य से वर्ष 2011 में ‘हिमावत पावर लिमिटेड’ और ‘लैंको अनपरा पावर लिमिटेड’ को भूमि आवंटित की गई थी। आरोप है कि कंपनियों ने आवंटन की शर्तों का पालन नहीं किया और बिना सक्षम अनुमति के भूमि को विभिन्न बैंकों के पास बंधक रखकर 400 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण प्राप्त कर लिया।सूत्रों ने बताया कि कंपनियों द्वारा निर्धारित अवधि में न तो थर्मल पावर परियोजना स्थापित की गई और न ही बैंकों का ऋण चुकाया गया। इसके बाद संबंधित बैंकों ने भूमि की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
जिलाधिकारी कपिल सिंह ने मामले की जांच कराई, जिसमें भूमि आवंटन की शर्तों के उल्लंघन तथा राजस्व हितों को प्रभावित किए जाने के तथ्य सामने आए। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई की। इसके साथ ही भोगनीपुर तहसील की ओर से थाना मूसानगर में संबंधित कंपनियों, कुछ बैंक अधिकारियों तथा तत्कालीन अपर जिलाधिकारी के विरुद्ध मुकदमा भी दर्ज कराया गया।श्री सिंह ने बताया कि उनकी रिपोर्ट एवं संस्तुति के आधार पर मंडलायुक्त ने भूमि आवंटन निरस्त करते हुए अधिग्रहीत भूमि को पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं।
मंडलायुक्त के. विजयेन्द्र पांडियन ने अपने आदेश में कहा है कि जांच में यह स्पष्ट पाया गया कि कंपनियों ने पट्टा विलेख की अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं किया तथा आवंटित भूमि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप नहीं किया गया। ऐसे में आवंटन निरस्त किए जाने की कार्रवाई न्यायोचित पाई गई।प्रशासन का कहना है कि भूमि का राजस्व अभिलेखों में पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है तथा प्रकरण में दर्ज मुकदमे की विवेचना के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।