यूपीपीएल चेयरमैन पर बरसे ऊर्जा मंत्री, बिना सहमति के कैसे लिया दस प्रतिशत अधिभार का फैसला

यूपीपीएल चेयरमैन पर बरसे ऊर्जा मंत्री, बिना सहमति के कैसे लिया दस प्रतिशत अधिभार का फैसला

लखनऊ, 11 जून। उत्तर प्रदेश में बिजली के बिलों में 10 प्रतिशत अधिभार लगाने के फैसले को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। उपभोक्ता परिषद द्वारा नियामक आयोग में मामला उठाए जाने के बाद अब प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा भी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीएल) के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं।ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने यूपीपीएल के चेयरमैन आशीष गोयल को कड़ा पत्र लिखकर कई सवाल खड़े किए हैं। पत्र में मंत्री ने पूछा है कि जून 2026 के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत अधिभार लगाने का निर्णय बिना उन्हें बताए और बिना उनकी अनुमति के कैसे लिया गया? उन्होंने कहा, “बिना अनुमति बिजली महंगी करने का फैसला कैसे हुआ।”

मंत्री ने पत्र में नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें इस अधिभार की जानकारी मीडिया से मिली। उन्होंने कहा कि “ऐसे महत्वपूर्ण विषय जिसका व्यापक असर हो, विभाग के मंत्री की सहमति क्यों नहीं ली गई। कम से कम ऐसे निर्णय की पूर्व जानकारी देना क्या उचित नहीं समझा गया। भविष्य में ऐसी बातें न हों, इसका ध्यान रखा जाए।”एके शर्मा ने यूपीपीएल की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि “मेरे बार-बार पत्र लिखने और मना करने के बाद भी कुशल कर्मचारियों की छंटनी बंद नहीं हुई, जिसके परिणाम आज भुगतने पड़ रहे हैं।”

उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सहारनपुर के बेहट डिवीजन में 15 वर्ष से कार्य कर रहे लाइनमैन सुंदर सैनी को हटाकर नए लाइनमैन को रख लिया गया। मंत्री ने इसकी जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि गर्मी के चुनौतीपूर्ण समय में अधिकांश विद्युत कर्मियों ने निष्ठा से काम किया, लेकिन कुछ कर्मियों ने जानबूझकर या लापरवाही से काम करते हुए सरकार को बदनाम किया।उन्होंने ऐसे कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने चेयरमैन को निर्देश दिया कि भविष्य में हेडक्वार्टर छोड़ने से पहले उन्हें अवगत कराया जाए। बिजली बिल में अधिभार और यूपीपीएल की कार्यप्रणाली को लेकर मंत्री के इस पत्र के बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है। अब देखना होगा कि यूपीपीएल इस पर क्या स्पष्टीकरण देता है और नियामक आयोग क्या निर्णय लेता है।

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