
लखनऊ, 11 जून। उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) भले ही अभी उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा न कर रही हो, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने संभावित प्रत्याशियों को संकेत देने शुरू कर दिए हैं। सपा के सूत्रों के अनुसार पार्टी की इस रणनीति के पीछे असली मंशा उस विधानसभा क्षेत्र में उभरने वाले असंतोष और बागियों का रूख भापना है।
सूत्रों ने बताया कि पार्टी ने यह रणनीति इसलिए अपनाई है ताकि उम्मीदवारों को जनता के बीच जाने, संगठन मजबूत करने और चुनावी तैयारी के लिए ज्यादा समय मिल सके।समाजवादी पार्टी (सपा) के एक वरिष्ठ नेता और वर्तमान सांसद के मुताबिक, मौजूदा समय में सपा अपने प्रत्याशियों के नाम फाइनल करने में जुटी है। करीब 150 ऐसी सीटें हैं जहां सपा के उम्मीदवार लगभग तय माने जा रहे हैं। जुलाई के अंत तक इन नामों की आधिकारिक घोषणा भी हो सकती है।”
उन्होंने कहा, “ 2012 के विधानसभा चुनाव में भी सपा ने इसी तरह की रणनीति अपनाई थी। इसका एक उद्देश्य संभावित बागियों की पहचान करना भी है। अगर कहीं असंतोष या बगावत है तो उसे चुनाव से पहले ही चिह्नित कर दूर किया जा सकेगा।”समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक अंबेडकरनगर, आजमगढ़, गाजीपुर, मऊ, अयोध्या, बस्ती, बलिया और वाराणसी जैसे जिलों की अधिकतर सीटों पर उम्मीदवार तय कर दिए गए हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी कुछ ही विधायकों का टिकट काट सकती है, अधिकतर मौजूदा विधायकों को दोबारा मौका मिलने की संभावना है।
सूत्रों की मानें तो सपा नेतृत्व अब तक करीब 40 जिलों की 150 से ज्यादा विधानसभा सीटों को लेकर संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर चुका है। जिला स्तर पर चल रही इस प्रक्रिया का दूसरा चरण भी जल्द शुरू होने वाला है। पार्टी का लक्ष्य जुलाई के पहले सप्ताह तक उम्मीदवारों की शॉर्ट लिस्टिंग की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना है।वरिष्ठ पदाधिकारी की मानें तो सपा की नजर उन नेताओं पर भी है जो वर्तमान में भाजपा, राष्ट्रीय लोकदल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी या अन्य दलों में हैं, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार पाला बदल सकते हैं।
सूत्रों की मानें तो पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक निर्देश भी चर्चा में है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जो संगठनात्मक पदों पर बैठे नेता विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्हें पहले अपना पद छोड़ना होगा।सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव इंडिया गठबंधन को मजबूत करने की वकालत करते रहे हैं और कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर उनका रुख सकारात्मक माना जाता है।
सपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, अगर दोनों दलों में गठबंधन होता है तो किन सीटों पर समझौता होगा, इस पर अभी मंथन जारी है।गौरतलब है कि सपा ने 2027 के चुनाव की जमीन अभी से तैयार करनी शुरू कर दी है। संभावित उम्मीदवारों को पहले से संकेत देकर पार्टी न केवल संगठन को सक्रिय कर रही है, बल्कि संभावित अंदरूनी चुनौतियों को भी समय रहते भांपना चाहती है।