तिलहन किसानों के लिए देश की पहली राष्ट्रव्यापी व्हाट्सएप एआई एडवाइजरी ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ सेवा शुरू

तिलहन किसानों के लिए देश की पहली राष्ट्रव्यापी व्हाट्सएप एआई एडवाइजरी ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ सेवा शुरू

नयी दिल्ली, 11 जून। देश के तिलहन किसानों के लिए एक विशेष व्हाट्सएप आधारित एआई सलाहकार सेवा ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ की शुरुआत की गयी है। यह सेवा देश के किसी भी हिस्से के किसानों के मोबाइल फोन पर उनकी अपनी भाषा में शोध-आधारित और भरोसेमंद कृषि जानकारी 24 घंटे मुफ्त उपलब्ध कराएगी।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के हैदराबाद स्थित केंद्रीय तिलहन अनुसंधान संस्थान ने इस महत्वाकांक्षी सेवा के शुभारंभ किया है। यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में गुरुवार को यह जानकारी दी गयी।

इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से सीधे तौर पर देश के किसान समुदाय को लाभ पहुंचाना है। इसके लिए किसानों को किसी भी प्रकार का कोई अतिरिक्त मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी। किसान केवल अपने फोन में 91 4024598180नंबर को ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ के नाम से सहेजकर व्हाट्सएप के माध्यम से सीधे जुड़ सकते हैं।

यह एआई-संचालित चैटबॉट 24 घंटे और सातों दिन क्रियाशील रहता है। कोई भी किसान अपनी क्षेत्रीय या पसंदीदा भारतीय भाषा में मूंगफली, सरसों, तिल, सूरजमुखी, सोयाबीन, रामतिल (नाइजर) और अन्य प्रमुख तिलहन फसलों से जुड़ा कोई भी सवाल टाइप करके या संदेश के रूप में पूछ सकता है।यह चैटबॉट उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसानों के सवालों को उनकी स्थानीय भाषा में समझता है और तुरंत सटीक वैज्ञानिक जवाब प्रदान करता है। आईआईओआर के निदेशक डॉ. आर.के. मथुर ने बताया कि यह पहली बार है, जब परिषद के संपूर्ण तिलहन अनुसंधान को एक ही साझा मंच पर देश के हर किसान के मोबाइल तक पहुंचाया जा रहा है। इस मजबूत नॉलेज बेस को तैयार करने में हैदराबाद संस्थान के साथ-साथ राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (इंदौर), भारतीय मूंगफली अनुसंधान संस्थान (जूनागढ़), भारतीय तोरिया और सरसों अनुसंधान संस्थान (भरतपुर) और पीसी-यूनिट (तिल और रामतिल) ने मिलकर काम किया है. इससे भारत के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों की सभी प्रमुख तिलहन फसलों की समस्याओं का व्यापक समाधान सुनिश्चित हो सकेगा।

खरीफ की बुवाई के इस महत्वपूर्ण समय में संस्थान ने देश भर के सभी तिलहन किसानों और कृषि हितधारकों से अपील की है कि वे इस ‘किसान मित्र’ नंबर को अपने फोन में सहेजें और चौबीसों घंटे मिलने वाली इस मुफ्त वैज्ञानिक सेवा का अधिक से अधिक लाभ उठायें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *