
गोरखपुर, 14 जून। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की सभी संस्थाओं से युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबर सुरक्षा और स्पेस साइंस जैसे अत्याधुनिक विषयों में दक्ष बनाने तथा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी प्रयास करने का आह्वान किया है।
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को गुरु गोरखनाथ मंदिर के सभाकक्ष में परिषद की साधारण बैठक की अध्यक्षता करते हुए संस्थाध्यक्षों और शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप युवाओं को तैयार करें। उन्होंने कहा कि जवान और किसान को सशक्त बनाकर ही स्वर्णिम भविष्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परिषद की संस्थाओं को गुणात्मक विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए संस्थाध्यक्षों, शिक्षकों और कर्मचारियों को समय के साथ स्वयं को निरंतर अद्यतन करना होगा तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाना होगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि ‘दिग्विजय नाथ एल.टी. प्रशिक्षण महाविद्यालय’ का नाम बदलकर अब ‘दिग्विजय नाथ कॉलेज ऑफ टीचर्स एजुकेशन’ किया जाएगा।
उन्होंने पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवाओं को महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर और स्पेस साइंस जैसे विषयों में प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया। साथ ही कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम संचालित करने पर बल दिया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं में इसके अनुरूप शिक्षण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा रोजगारपरक होनी चाहिए, ताकि छात्र-छात्राओं को शिक्षा पूर्ण करने के बाद रोजगार के लिए भटकना न पड़े। पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष और कौशलयुक्त बनाने के लिए सभी को समन्वित प्रयास करने होंगे।
मुख्यमंत्री ने संस्थाध्यक्षों को निर्देशित किया कि वे अपनी संस्थाओं तथा कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से क्षेत्रीय किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें अत्याधुनिक खेती की तकनीकों से जोड़ें। उन्होंने चिकित्सा सेवाओं को भी अधिक प्रभावी ढंग से आमजन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि नए पाठ्यक्रम युगानुकूल होने चाहिए, जो विद्यार्थियों को बदलते समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाएं। दुनिया तेजी से बदल रही है, ऐसे में युवाओं को आधुनिक तकनीकों में पारंगत बनाना समय की आवश्यकता है। इसके लिए शैक्षणिक परिसरों में तकनीकी शिक्षा का विस्तार किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परिषद के संस्थाध्यक्षों, शिक्षकों और कर्मचारियों को जनता की खुशहाली में अपना योगदान सुनिश्चित करना होगा। इसके लिए संस्थाओं की गतिविधियों को जन आवश्यकताओं से जोड़ना होगा तथा उसी अनुरूप पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक संस्था का स्पष्ट लक्ष्य होना चाहिए और संस्थाध्यक्षों को अपनी टीम के साथ नवाचार, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, समयबद्धता और अनुशासन के साथ कार्य करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के शताब्दी वर्ष-2032 को भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप में मनाने के लिए अभी से तैयारियां प्रारंभ करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि परिषद की स्थापना वर्ष 1932 में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने की थी, जिसे राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने विस्तार प्रदान किया तथा वर्तमान में इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।
बैठक में बतौर परिषद अध्यक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देश दिया कि वे शताब्दी वर्ष समारोह के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध ढंग से तैयारियों में जुट जाएं