
नयी दिल्ली, 15 जून । कांग्रेस ने अमेरिकी हमले में भारतीय जहाज के चालक दल के तीन सदस्यों की मौत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चुप्पी तोड़ने और इस मामले में कड़ा विरोध दर्ज कराने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि भारतीय नागरिकों की हत्या पर प्रधानमंत्री को शोक व्यक्त करने के साथ ही समुद्री सुरक्षा की व्यापक समीक्षा करानी चाहिए।
कांग्रेस सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स विभाग प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले में कड़ा विरोध दर्ज करने के साथ ही विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बयान की भी निंदा करनी चाहिए।
श्रीमती श्रीनेत ने हमले में मारे गए हिमाचल प्रदेश के आदित्य शर्मा, उत्तर प्रदेश के शिवानंद चौरसिया और आंध्र प्रदेश के पटनाला सुरेश को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नाविकों के परिवार गहरे सदमे में हैं और पूरे देश में शोक का माहौल है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 11 जून को ओमान की खाड़ी में एमटी सेट्टेबेल्लो जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई। उनका कहना था कि जहाज पर हमला करते समय यह जानकारी थी कि उसमें भारतीय नागरिक सवार हैं, इसके बावजूद हमला किया गया। उन्होंने कहा कि भारत का इस युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय नागरिकों की जान गई, जिससे पूरा देश गमगीन है।
श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने न तो शोक व्यक्त किया और न ही सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की ओर से आपत्ति जताए जाने के बावजूद विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बयान में भारतीय नागरिकों की मौत को उचित ठहराने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय त्रासदी और राष्ट्रीय शोक का विषय है। उनका आरोप था कि भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को पर्याप्त मजबूती से नहीं उठाया।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होती है तो उन्हें यह मुद्दा उनके समक्ष प्रमुखता से उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस मुद्दे पर वह नरम रुख क्यों अपना रही है। उनका कहना था कि मारे गए लोग छोटे शहरों के सामान्य परिवारों से थे, लेकिन उनकी मौत पर भी प्रधानमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
उन्होंने कहा कि सरकार को भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाना चाहिए।