प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने और स्वस्थ समाज के निर्माण का प्रभावी माध्यम : योगी

प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने और स्वस्थ समाज के निर्माण का प्रभावी माध्यम : योगी

कानपुर, 18 जून । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने तथा स्वस्थ समाज के निर्माण का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा संबंधित संस्थाओं का आह्वान किया कि प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाए।चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थित कैलाश भवन सभागार में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला’ को संबोधित करते हुए उन्होने कहा कि भारतीय परंपरा में गौमाता का विशेष स्थान है और गौ आधारित कृषि व्यवस्था देश की कृषि संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार रही है। गौ आधारित प्राकृतिक खेती न केवल कृषि को सशक्त बनाती है, बल्कि गोसंवर्धन को भी प्रोत्साहित करती है। प्रदेश सरकार का संकल्प है कि गोवंश संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए तथा प्राकृतिक खेती को व्यापक रूप से अपनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज किसान रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर बड़ी राशि खर्च कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती अपनाने से उर्वरकों और कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम होगा, भूमि की उर्वरता संरक्षित रहेगी तथा किसानों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि यदि किसान गौ आधारित प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते हैं तो कृषि लागत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।उन्होने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग का प्रभाव केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि आज विभिन्न गंभीर बीमारियों के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में प्राकृतिक खेती स्वस्थ जीवन और बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश के 34 जनपदों में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। गंगा तटवर्ती 27 जनपदों तथा बुंदेलखंड के सात जनपदों में इस दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के किसानों ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।            उन्होने प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों के सर्टिफिकेशन, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर विशेष बल देते हुए कहा कि किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए मजबूत विपणन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। कृषि मंडियों में इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं तथा प्राकृतिक उत्पादों के लिए प्रभावी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 7700 से अधिक गौशालाओं में 14 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के माध्यम से गोवंश संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में किसान गोवंश पालन से जुड़े हैं तथा उन्हें आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया जाता है। गोबर, जीवामृत तथा अन्य जैविक तत्वों के माध्यम से खेती को अधिक टिकाऊ, कम खर्चीला और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है। गाय से प्राप्त गोबर और अन्य संसाधन प्राकृतिक खेती की मजबूत आधारशिला बन सकते हैं।

योगी ने किसानों से पराली जलाने के बजाय उसके वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पराली, गोवंश आधारित संसाधनों तथा कृषि अवशेषों का उपयोग कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी), एथेनॉल तथा अन्य ऊर्जा स्रोतों के उत्पादन में किया जा सकता है। इससे किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ेगी तथा देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में और आगे बढ़ेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर गांव और स्वस्थ समाज आवश्यक हैं। भारत तब विकसित होगा जब गांव विकसित होंगे, किसान समृद्ध होंगे और कृषि व्यवस्था अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनेगी। प्राकृतिक खेती इस लक्ष्य की प्राप्ति का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

उन्होने कहा कि प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों को प्राकृतिक खेती के प्रदर्शन और प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है। किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा सफल किसानों के अनुभवों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता है, जिससे प्राकृतिक खेती का दायरा और व्यापक हो सके।इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक कृषि में उत्कृष्ट कार्य करने वाले छोटेलाल, राजेश कुमार त्रिपाठी, आशीष कुमार, सुनील सिंह कटियार, फूल सिंह यादव को सम्मानित किया। कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत दिनेश कुमार तथा उमा सिंह को 5-5 लाख रुपए का चेक प्रदान किया। प्रगतिशील किसान विपिन शुक्ला तथा आशीष कुमार को श्री अन्न की किट प्रदान की। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मुख्यमंत्री को गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा लिखित ‘प्राकृतिक खेती’ नामक पुस्तक भेंट की जबकि जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री को बिठूर के माटी कला कारीगरों एवं आईटीआईटी कानपुर द्वारा निर्मित मिट्टी की गुल्लक एवं प्रसिद्ध कलाकार रंजीत सिंह द्वारा निर्मित ताम्र चित्र भेंट की।

इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, सांसद रमेश अवस्थी, महापौर प्रमिला पांडेय, विधायक नीलिमा कटियार, विधायक सुरेंद्र मैथानी, विधायक महेश त्रिवेदी, विधायक अभिजीत सिंह सांगा, राहुल बच्चा सोनकर, विधायक सरोज कुरील, विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक, जिला पंचायत अध्यक्ष, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधिगण, मंडलायुक्त के.विजयेंद्र पांडियन, पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, सीडीओ अभिनव जैन तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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