
मेरठ, 18 जून। उत्तर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने गोवंश संरक्षण और गोसेवा के मुद्दे पर केंद्र तथा राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह विषय देश और समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा इसके स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए।यहां बिजली बंबा बाईपास स्थित भडाना फार्म हाउस में आयोजित एक निजी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि गोवंश संरक्षण को लेकर स्पष्ट और प्रभावी नीति की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कुछ नीतियां और सार्वजनिक वक्तव्य इस विषय पर सकारात्मक संदेश देने में सफल नहीं रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्व में जम्मू-कश्मीर में गोहत्या पर प्रतिबंध था लेकिन समय के साथ कानूनी व्यवस्थाओं में परिवर्तन हुए हैं। उनके अनुसार गोवंश संरक्षण के प्रश्न पर व्यापक और गंभीर विचार-विमर्श की आवश्यकता है।शंकराचार्य ने सामाजिक समरसता पर बल देते हुए कहा कि सरकार को समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाजनकारी सोच से बचते हुए सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक एकता को मजबूत करने के प्रयास होने चाहिए।
शंकराचार्य ने गोवंश को भारतीय कृषि व्यवस्था और भूमि की उर्वरता से जुड़ा बताते हुए कहा कि इसके संरक्षण से खेती, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण जीवन और कृषि आधारित व्यवस्था में गोवंश की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है।कार्यक्रम के अंत में शंकराचार्य ने उपस्थित लोगों को गोसेवा और गोवंश संरक्षण का संकल्प दिलाते हुए समाज से इस दिशा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।