काम नहीं मिलने पर शुरू किया कारोबार : रिया चक्रवर्ती

काम नहीं मिलने पर शुरू किया कारोबार : रिया चक्रवर्ती

मुंबई, 25 जून। अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती ने खुलासा किया है कि वर्ष 2020 के बाद जब उन्हें पेशेवर अवसर नहीं मिल रहे थे, तब उन्होंने साथ मिलकर अपना कारोबार शुरू करने का फैसला किया।नेहा धूपिया और अंगद बेदी के चैट शो ‘डबल डेट’ में बातचीत के दौरान रिया और शोविक ने अपने जीवन के कठिन दौर, पारिवारिक रिश्तों और व्यवसायिक साझेदारी के अनुभव साझा किए।रिया ने कहा कि भाई-बहन के साथ काम करना आसान नहीं होता, क्योंकि व्यक्तिगत और पेशेवर रिश्तों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने कहा, “यदि घर पर किसी बात को लेकर आप पहले से नाराज़ हैं और फिर ऑफिस में कोई छोटी गलती हो जाए, तो वह कहीं ज्यादा बड़ी लगने लगती है।”

उन्होंने बताया कि कारोबार के शुरुआती दिनों में दोनों के बीच अक्सर बहस हो जाती थी।रिया ने कहा, “शुरुआत में हमारे लिए यह काफी मुश्किल था। कई बार तो शोविक कमरे से बाहर जाते-जाते कहता था कि वह घर छोड़कर जा रहा है।”

हालांकि, रिया का मानना है कि शोविक के अलग रहने लगने के बाद चीजें बेहतर हो गईं। उन्होंने कहा, “हम पूरा दिन ऑफिस में साथ बिताते हैं, इसलिए घर पर अपनी-अपनी जगह होने से बेहतर संतुलन बन गया है।”रिया ने कहा कि परिवार के साथ काम करने का सबसे बड़ा फायदा भरोसा होता है। उन्होंने बताया कि अपने छोटे भाई को उनकी कंपनी ‘चैप्टर 2’ का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनते देखना उनके लिए विशेष अनुभव रहा है।

कंपनी के नाम को लेकर भी रिया ने रोचक खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वह शुरुआत में कंपनी का नाम ‘चुड़ैल का बदला’ रखना चाहती थीं। बाद में उन्होंने ‘ब्लैक शीप’ नाम पर भी विचार किया, क्योंकि उस समय दोनों खुद को समाज का ‘ब्लैक शीप’ महसूस करते थे। अंततः उन्होंने ‘चैप्टर 2’ नाम चुना, जो उनके जीवन की नई शुरुआत का प्रतीक बना।वहीं शोविक ने कहा कि उन्होंने यह कारोबार इसलिए शुरू किया क्योंकि उस समय उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने बताया कि जिस वर्ष उन्हें गिरफ्तार किया गया, उसी वर्ष उन्हें एमबीए में दाखिला मिला था और उन्होंने 97 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।

रिया ने कहा, “2020 के बाद मुझे काम मिलना बंद हो गया था। मुझे कोई साइन नहीं कर रहा था और उसे भी कोई नौकरी नहीं दे रहा था।”दोनों ने माना कि कठिन दौर में एक-दूसरे का साथ और आपसी भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने कहा कि भाई-बहन के रिश्ते और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन सहयोग और विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

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