
ढाका/नयी दिल्ली, 25 जून। भारत ने बंगलादेशी नागरिकों के लिए सामान्य यात्रा वीजा जारी करने की प्रक्रिया को फिर से शुरू करके दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर करने का एक नया प्रयास किया है।भारत की ओर से यह घोषणा उसी दिन की गयी, जब बंगलादेश में भारत के नये उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बंगलादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को औपचारिक रूप से अपना परिचय पत्र सौंपा।राजनयिकों और विश्लेषकों द्वारा इस कदम को भारत द्वारा सामान्य जन-संपर्क को बहाल करने और उन संबंधों को गति देने के एक व्यापक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जो अगस्त 2024 में बंगलादेश में हुए राजनीतिक उलटफेर के बाद से तनावपूर्ण हो गये थे।ढाका के जमुना फ्यूचर पार्क स्थित भारतीय वीजा आवेदन केंद्र में श्री त्रिवेदी ने घोषणा की कि भारत 28 जून से सामान्य यात्रा वीजा के लिए आवेदन स्वीकार करना फिर से शुरू कर देगा। उन्होंने कहा, “मुझे सामान्य यात्रा वीजा की शुरुआत की दोबारा घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है। वीजा आवेदन 28 जून से जमा किये जा सकते हैं। मानवीय कारणों से तत्काल चिकित्सा वीजा की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी।”राजदूत ने बताया कि वीजा सेवाएं शुरू में ढाका, राजशाही, चटगांव, सिलहट और खुलना के केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध होंगी और भविष्य में इसका और विस्तार करने की योजना है। वर्ष 2024 में बंगलादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद ढाका में भारत के सांस्कृतिक केंद्र को जलाए जाने की घटना के बाद वीजा व्यवस्था को केवल आपातकालीन वीजा तक सीमित कर दिया गया था। तब से बंगलादेशी नागरिकों के लिए भारत के वीजा नियमों में यह अब तक की सबसे बड़ी ढील है।आपातकालीन चिकित्सा वीजा सुविधा हालांकि जारी था, लेकिन सामान्य यात्रा श्रेणियों पर प्रतिबंध रहने से पर्यटन, पारिवारिक यात्राओं, शिक्षा और व्यावसायिक यात्राओं पर बुरा असर पड़ा था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जहां 2024 में लगभग 17.5 लाख बंगलादेशी नागरिकों ने भारत का दौरा किया था, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर केवल 4.7 लाख रह गयी, जिससे लाखों आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बंगलादेशियों के लिए इलाज, खरीदारी, पर्यटन और शिक्षा जैसे विभिन्न कारणों से भारत पारंपरिक रूप से सबसे सुलभ विदेशी गंतव्यों में से एक रहा है।यात्रा वीजा की यह घोषणा श्री त्रिवेदी द्वारा राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति शहाबुद्दीन को औपचारिक रूप से अपना परिचय पत्र सौंपकर अपना राजनयिक कार्यभार संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर आयी। भारत द्वारा बंगलादेश के साथ अपने संबंधों को दिए जा रहे बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए, भारत सरकार ने बुधवार को जारी एक अधिसूचना के माध्यम से श्री त्रिवेदी को केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के समकक्ष का दर्जा दिया है।ढाका में राजनयिक विश्लेषकों ने उल्लेख किया कि वीजा सेवाओं की बहाली इस बात का शुरुआती संकेत है कि भारत ने अपने नये दूत के लिए क्या प्राथमिकताएं तय की हैं, जिसमें स्पष्ट रूप से जनता के बीच सद्भावना का पुनर्निर्माण करना और मानवीय संबंधों को मजबूत करना शामिल है।यह कदम एक संवेदनशील भू-राजनीतिक मोड़ पर भी आया है। बंगलादेश के बदलते विदेश नीति रुख के बीच, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बीजिंग की चल रही यात्रा और चीन से लड़ाकू विमान खरीदने का एक प्रस्तावित सौदा चर्चा में है। श्री रहमान शनिवार को ऐतिहासिक ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक करने वाले हैं।पूर्व सहायक उच्चायुक्त आर के रैना ने कहा, “सीमा पार व्यापार और व्यावसायिक आदान-प्रदान को दोनों पड़ोसियों के बीच अपेक्षाकृत आसान यात्रा से लंबे समय से लाभ मिला है। इस कदम से भारत में शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को भी बंगलादेशी आगंतुकों की मांग में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।”राजनयिकों का कहना है कि यह निर्णय दोनों देशों की राजधानियों में इस बात की स्वीकार्यता को दर्शाता है कि समय-समय पर होने वाले राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, दोनों के संबंध भूगोल, आर्थिक अंतर-निर्भरता और व्यापक जन-संपर्क से जुड़े हैं।ढाका में श्री त्रिवेदी के कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही सामान्य वीजा का दोबारा शुरू होना केवल एक प्रशासनिक कदम से कहीं बढ़कर है। यह व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से दक्षिण एशिया के सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में से एक को मजबूत करने की भारत की इच्छा का संकेत देता है।