राष्ट्र की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तत्पर है सेना: जनरल सेठ

राष्ट्र की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तत्पर है सेना: जनरल सेठ

नयी दिल्ली, 01 जुलाई। नवनियुक्त सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि भारतीय सेना राष्ट्र की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सदैव पूरी तरह तत्पर रहेगी।जनरल सेठ ने बुधवार को यहां सलामी गारद का निरीक्षण करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि 31वें सेना प्रमुख का दायित्व ग्रहण करना उनके लिए अत्यंत गौरव और विनम्रता का क्षण है । उन्होंने कहा, ” मैं इस उत्तरदायित्व को कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सर्वोपरि के आदर्शों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ स्वीकार करता हूँ।”

देशवासियों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा, “मैं देश के प्रत्येक नागरिक को यह विश्वास दिलाता हूँ कि भारतीय थल सेना राष्ट्र की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सदैव पूर्णतः तत्पर रही है और आगे भी रहेगी।”सेवा प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना युद्ध-सज्जित तथा युद्ध-अनुभवी सेना है, जो प्रत्येक परिचालन चुनौती का सामना करने के लिए पूर्णतः तैयार और सक्षम है। निरंतर परिवर्तित हो रहे सुरक्षा परिवेश के अनुरूप प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए हमें नव ऊर्जा और दृढ़ संकल्प के साथ सेना के आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाना होगा। हमारा लक्ष्य ऐसी प्रौद्योगिकी-सक्षम, भविष्य के लिए तैयार सेना का निर्माण करना है, जो पूर्णतः सशक्त हो तथा बहु-आयामी परिचालन क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम हो।

उन्होंने कहा कि इन्हीं उद्देश्यों को को ध्यान में रखते हुए तथा सरकार के परिवर्तन के दशक के अंतर्गत दिए गए मार्गदर्शन से प्रेरणा प्राप्त करते हुए उन्होंने अपने प्रमुख प्राथमिकता क्षेत्रों का निर्धारण किया है। उन्होंने कहा,”इन्हें मैंने ‘विजय’ संक्षिप्त रूप में समाहित किया है। ‘विजय’ का प्रत्येक अक्षर मेरी प्राथमिकताओं का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें ‘व’ का अर्थ है सतर्कता। हम अपनी सीमाओं तथा उभरते हुए खतरों के प्रति निरंतर सजग रहेंगे। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष उत्पन्न होने वाली किसी भी चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए उच्च स्तर की परिचालन तत्परता बनाए रखेंगे।’ई’ का अर्थ है नवाचार और रूपांतरण। मेरा विशेष ध्यान सैन्य सिद्धांतों तथा प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों में नवाचार पर रहेगा। नवाचार हमारी सोच, हमारी प्रणालियों तथा हमारी क्षमता निर्माण प्रक्रिया का अभिन्न अंग बना रहेगा। साथ ही, युद्ध की बदलती प्रकृति के अनुरूप आवश्यक रूपांतरण भी किए जाएँगे।

उन्होंने कहा कि विजय में ‘ज’ का अर्थ है संयुक्तता और एकीकरण। भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए हम भारतीय वायु सेना तथा भारतीय नौसेना के साथ पूर्ण समन्वय और सामंजस्य बनाए रखेंगे। मैं भली-भाँति समझता हूँ कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है। इसके लिए सैन्य-नागरिक समन्वय तथा समग्र राष्ट्र दृष्टिकोण आवश्यक है। यही एकीकृत दृष्टिकोण राष्ट्र निर्माण तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में भी हमारे सार्थक योगदान का आधार बनेगा।उन्होंने कहा कि इसमें ‘अ’ का अर्थ है आत्मनिर्भरता। देश में विकसित स्वदेशी क्षमताओं और प्रौद्योगिकियों के आधार पर हमें आत्मनिर्भर सेना का निर्माण करना होगा। हमारा समग्र उद्देश्य होगा— “स्वदेशी समाधानों के माध्यम से अपने युद्धों में विजय प्राप्त करना।”

सेना प्रमुख ने कहा कि विजय में ‘य’ का अर्थ है योद्धा सर्वोपरि। मेरी दृष्टि में अग्निवीर से लेकर वरिष्ठतम पूर्व सैनिक तक प्रत्येक व्यक्ति एक योद्धा है। यही योद्धा हमारी सेना की सबसे बड़ी शक्ति हैं। हमारे सैनिकों की प्रौद्योगिकी दक्षता तथा प्रशिक्षण के स्तर को और अधिक सुदृढ़ बनाना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रहेगा। हमारे पूर्व सैनिक तथा वीर नारियाँ सेना परिवार का अभिन्न अंग हैं और उनका कल्याण, सशक्तीकरण तथा व्यावसायिक उन्नति मेरे लिए सदैव अत्यंत महत्वपूर्ण रहेंगे।जनरल सेठ ने कहा, “उनका दृढ़ विश्वास है कि प्रधानमंत्री द्वारा सशस्त्र सेनाओं के लिए दिया गया ‘जय’ मंत्र, उनकी ‘विजय’ प्राथमिकताओं का आधार है और यही हमें सफलता की ओर मार्गदर्शन करेगा। अतः मेरा मार्गदर्शक ध्येय वाक्य होगा— जय से विजय।”

सेना प्रमुख ने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को भी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन सैनिकों का साहस, कर्तव्यनिष्ठा और निःस्वार्थ समर्पण आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *