
नयी दिल्ली 14 जुलाई । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल विजय दिवस से पहले मंगलवार को यहां राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक 13 दिन की ‘शौर्य विजय यात्रा’ , एक यादगार मोटरसाइकिल अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।इस अभियान में 28 मोटरसाइकिल सवार शामिल होंगे, जिनमें सेना के सेवारत , सेवानिवृत्त जवान और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं। ये मोटरसाइकिल सवार 1999 के कारगिल युद्ध में जीत दिलाने वाले भारतीय बहादुरों के साहस, संकल्प और सर्वोच्च बलिदान का सम्मान करने के लिए उत्तरी हिमालय के कठिन रास्तों से होते हुए 1,900 किलोमीटर की यात्रा करेंगे। इस अभियान का आदर्श वाक्य है ‘एक यात्रा, एक राष्ट्र, एक सलाम’।
रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर उन बहादुर भारतीय सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी जिन्होंने साहस, धैर्य, अनुशासन और बेमिसाल देशभक्ति का एक स्वर्णिम अध्याय लिखा, जिसका अध्ययन और सम्मान आज भी दुनिया भर की सेनाएं करती हैं। उन्होंने कहा, “लगभग 20,000 फुट की ऊंचाई और शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे के तापमान में भी हमारे सैनिकों ने साहस और दृढ़ता के साथ अपने लक्ष्यों को हासिल किया। उन्होंने दुश्मन के कब्जे से हर चोटी, पहाड़ी और बंकर को वापस जीता और तिरंगे का मान बढ़ाया। यह जीत हमारी ज़मीन, पहचान और सम्मान पर बुरी नज़र डालने वालों को पूरी ताकत से जवाब देने के भारत के अटूट संकल्प को दर्शाती है।”श्री सिंह ने युद्ध में जीत सुनिश्चित करने में अमूल्य योगदान देने वाले सभी भारतीय बहादुरों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया, जिनमें परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, सूबेदार मेजर ( मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (सेवा निवृत) और सूबेदार मेजर ( मानद कैप्टन) संजय कुमार (सेवा निवृत) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये बहादुर सैनिक युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।
यात्रा के दौरान, मोटरसाइकिल सवार चंडीमंदिर युद्ध स्मारक, रेज़ांग ला युद्ध स्मारक और लेह युद्ध स्माकर जैसे प्रमुख सैन्य स्मारकों पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। वे ‘वीर नारियों’ (शहीद सैनिकों की पत्नियों) से भी मिलेंगे और उनके साहस व दृढ़ता का सम्मान करते हुए उन्हें सम्मानित करेंगे। यह अभियान 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के मौके पर कारगिल युद्ध स्मारक पर समाप्त होगा।अभियान के दौरान, माेटरसाइकिल सवार अपने साथ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की पवित्र मिट्टी वाला एक कलश ले जाएंगे, जिसे कारगिल में शहीद हुए वीरों की याद में अर्पित किया जाएगा। रक्षा मंत्री ने कहा, “जब यहां की मिट्टी कारगिल की मिट्टी के साथ मिलेगी, तो यह देश की मौजूदा पीढ़ी के सम्मान और देश के वीरों की वीरता के मिलन का प्रतीक होगी।”
शौर्य विजय यात्रा के एक अहम पहलू पर बात करते हुए श्री सिंह ने कहा कि यह अभियान देश के अलग-अलग हिस्सों से आए सेवारत अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और आम नागरिकों को एक साथ लाता है। उन्होंने कहा, “अलग-अलग पृष्ठभूमि, भाषाएं और परंपराएं, फिर भी एक तिरंगा, एक राष्ट्र और हमारे वीरों के लिए एक जैसा सम्मान – यही हमारे देश की असली पहचान है।”कार्यक्रम में राष्ट्रीय कैडेट कोर के कैडेटों की मौजूदगी में रक्षा मंत्री ने भरोसा जताया कि यह अभियान लोगों, खासकर युवाओं में देशभक्ति की नई भावना जगाएगा। उन्होंने कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि देश की आज़ादी और सम्मान की रक्षा सिर्फ़ सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि हमारी यादों और मूल्यों में भी होती है।
इस मौके पर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। शौर्य विजय यात्रा ‘ऑपरेशन विजय’ के दौरान दिखाए गए मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय सेना के संकल्प को दर्शाती है। साहस की इस यात्रा को फिर से दोहराकर, यह अभियान आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्य, सम्मान और निस्वार्थ सेवा की भावना बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है।