
नयी दिल्ली, 14 जुलाई । परमाणु, जैविक या रासायनिक (एनबीसी) हमलों के समय राहत एवं बचाव दलों के लिए जरूरी एनबीसी सूट के देश में ही बनने से करोड़ों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है।राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम् में 14 से 17 जुलाई तक आयोजित वैश्विक टेक्सटाइल प्रदर्शनी ‘भारत टेक्स 2026’ में अरविंद लिमिटेड के स्टोर पर ऐसे ही एक सूट का प्रदर्शन किया गया है। यह एनबीसी-6 पर्मिएबल सूट है जो परमाणु विकिरण, आग, जैविक हथियारों और रासायनिक अस्त्रों से सुरक्षा प्रदान करता है। इस सूट के सेट में चेहरे पर मास्क, हाथों में दस्ताने, पैरों में जूते और एक बैग भी शामिल होता है। यह पूरा सेट पहनने पर ही एनबीसी खतरों से सुरक्षा मिलती है।
अरविंद एडवांस्ड मटेरियल के मुख्य विपणन प्रबंधक शरद शुक्ला ने समाचार एजेंसी ‘यूनीवार्ता’ को बताया कि कंपनी ने शुरूआत में एनबीसी-5 सूट वर्ष 2016 में पेश किया था। उस संस्करण के 10-12 हजार सूट की आपूर्ति सशस्त्र बलों और दूसरी एजेंसियों के लिए सरकार को की जा चुकी है। एनबीसी-6 उसका अगला संस्करण है जो उससे भी उन्नत है।परमाणु हमले में राहत एवं बचाव कार्य तापमान कुछ कम होने के बाद शुरू हो पाता है। उस समय राहत एवं बचाव दल को इस सूट की जरूरत होती है जबकि रासायनिक एवं जैविक हमले की स्थिति में दल को तुरंत भेजा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस सूट में फेबरिक की दो परतें हैं। ऊपरी परत आग, तेल और पानी से बचाती है। अंदर की परत, जो कार्बन फेब्रिक से बनी है, गैस और विकिरण से सुरक्षा प्रदान करती है। एनबीसी-6 सूट को जल्द ही रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से अस्थायी प्रमाणन मिलने की उम्मीद है। उसके बाद सेना को उसकी बिक्री शुरू की जा सकेगी।श्री शुक्ला ने बताया कि केवल सूट की कीमत 30 हजार रुपये और पूरे सेट की कीमत 60-65 हजार रुपये है। देश में हर साल 50 से 60 हजार एनबीसी सूट की जरूरत है। पहले इसी तरह के सूट दो-सवा दो लाख रुपये में विदेशों से आयात किये जाते थे।
निर्यात की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इनका निर्यात सिर्फ सरकार के माध्यम से किया जा सकता है। फिलहाल कंपनी इसका निर्यात नहीं कर रही है, लेकिन ऐसा कोई प्रस्ताव आने पर वह निर्यात के लिए तैयार है।