वर्मी कम्पोस्ट से आत्मनिर्भर बन रहीं ग्राम पंचायतें, बिक्री से करीब 90 हजार रुपये की आय

वर्मी कम्पोस्ट से आत्मनिर्भर बन रहीं ग्राम पंचायतें, बिक्री से करीब 90 हजार रुपये की आय

कानपुर, 15 जुलाई । स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत कानपुर नगर की ग्राम पंचायतों में स्थापित रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) अब केवल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का माध्यम नहीं, बल्कि पंचायतों के लिए आय का नया स्रोत भी बन रहे हैं। वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के दौरान तैयार वर्मी कम्पोस्ट की बढ़ती मांग से ग्राम पंचायतों को करीब 90 हजार रुपये की आय हुई है, जिसे उनके ओन सोर्स रेवेन्यू (ओएसआर) खाते में जमा किया जाएगा।पंचायती राज विभाग के अनुसार जिले की रमईपुर, रामपुर भीमसेन, चौबेपुर कलां, बगदौदी बांगर, बिल्हौर देहात, उत्तरी, पतारा और मंझावन सहित कई ग्राम पंचायतों में आरआरसी के माध्यम से घर-घर से एकत्रित गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर उच्च गुणवत्ता की वर्मी कम्पोस्ट तैयार की जा रही है। इससे एक ओर गीले अपशिष्ट का पर्यावरण अनुकूल निस्तारण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पंचायतों की आय में भी वृद्धि हो रही है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर संचालित वृक्षारोपण महाअभियान के तहत विभिन्न विभागों द्वारा ग्राम पंचायतों में तैयार जैविक खाद का उपयोग किया जा रहा है। इसी क्रम में रमईपुर से 3,150 किलोग्राम, रामपुर भीमसेन से 1,200 किलोग्राम, चौबेपुर कलां से 1,030 किलोग्राम तथा मंझावन से 650 किलोग्राम सहित कुल 6,030 किलोग्राम वर्मी कम्पोस्ट 15 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया गया, जिससे लगभग 90 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई।अधिकारियों ने बताया कि यह राशि संबंधित ग्राम पंचायतों के ओएसआर खाते में जमा की जाएगी। पंचायतें इस धनराशि का उपयोग संविधान की 29 विषयगत जिम्मेदारियों के अंतर्गत स्थानीय विकास कार्यों पर कर सकेंगी। आगामी दिनों में नगर निगम, कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए), उद्यान विभाग तथा अन्य सरकारी संस्थानों को भी वर्मी कम्पोस्ट की आपूर्ति की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन और विपणन का यह मॉडल लगातार मजबूत किया गया तो ग्राम पंचायतें वित्तीय रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इसके साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि रिसोर्स रिकवरी सेंटरों के माध्यम से तैयार वर्मी कम्पोस्ट स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की एक सफल पहल है। इससे गीले अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन होने के साथ पंचायतों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण महाअभियान के दौरान जैविक खाद की बढ़ती मांग से ग्राम पंचायतों के ओएसआर को मजबूती मिलेगी और स्थानीय विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।

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