
वॉशिंगटन/येरूशलेम, 15 जुलाई । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सीरिया और दक्षिणी लेबनान से इजरायली सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का बार-बार आग्रह कर रहे है। इस आशय की रिपोर्ट अमेरिकी एवं इजरायली अधिकारियों के हवाले से ‘एक्सियोस’ ने दी है।इस अनुरोध को दोनों नेताओं के बीच विवाद का नया मुद्दा माना जा रहा है, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि क्षेत्र में इजरायल की सैन्य मौजूदगी कम हो, जबकि प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सरकार अपनी सैन्य तैनाती बनाये रखने के पक्ष में है।
एक्सियोस के अनुसार, श्री ट्रंप ने गुरुवार को फोन पर श्री नेतन्याहू से कहा कि दक्षिणी सीरिया में इजरायल की सैन्य मौजूदगी से और अस्थिरता बढ़ने का खतरा है।रिपोर्टों के अनुसार, श्री ट्रंप ने इजरायली नेता से कहा, “वे नहीं चाहते कि आप वहां रहें। आपको अपनी तैनाती हटा लेनी चाहिए।” कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति ने दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना को लेकर भी ऐसा ही संदेश दिया है।
यह बातचीत पिछले हफ़्ते तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन में श्री ट्रंप और सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शारा के बीच हुई मुलाक़ात के बाद हुई। यह पहल ऐसे समय में की जा रही है, जब अमेरिका पिछले महीने इजरायल-लेबनान के बीच हुए अमेरिकी-समर्थित प्रारूप समझौते को लागू करने की कोशिश कर रहा है।इस समझौते के अंतर्गत, इजरायल दक्षिणी लेबनान के दो पायलट ज़ोन से अपनी सेना हटाने और लेबनानी सेना को नियंत्रण सौंपने पर सहमत हुआ था। हालांकि, इज़रायली सेना ने अभी तक सेना हटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है।
इजरायल का कहना है कि दक्षिणी सीरिया और लेबनान में उसकी तैनाती जरूरी है, ताकि सात अक्टूबर, 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए आतंकी हमले जैसे सीमा-पार हमलों को रोका जा सके। श्री नेतन्याहू के गठबंधन के कई वरिष्ठ सदस्यों ने इन इलाकों में लंबे समय तक सेना की मौजूदगी की वकालत की है और कुछ ने तो वहां यहूदी बस्तियां बसाने की भी मांग की है।बातचीत के बाद जारी बयान में नेतन्याहू कार्यालय ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने इजरायल की सीमाओं के साथ सुरक्षा ज़ोन की आवश्यकता पर जोर दिया है।
‘द येरूशलेम पोस्ट’ ने मंगलवार को रक्षा अधिकारियों के हवाले से कहा था कि इजरायली सेना ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट से हैरान थी और उसने दृढ़ता से कहा कि लेबनान या सीरिया में ज़मीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं हुआ है।हाल के महीनों में श्री ट्रंप ने लेबनान में इजरायली सेना की कार्रवाई की बार-बार आलोचना की है और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर श्री नेतन्याहू के नजरिये से गहरी निराशा जतायी है।
ह्वाइट हाउस ने दोनों नेताओं के बीच हुई विस्तृत बातचीत पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट को गलत भी नहीं बताया है। इजरायल के लिए अमेरिका के समर्थन को दोहराते हुए एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप से बड़ा इज़रायल का कोई दोस्त और शांति के लिए लड़ने वाला नहीं रहा है।”