चीन ने रूस के खिलाफ अमेरिका के प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक पर कड़ा विरोध जताया

चीन ने रूस के खिलाफ अमेरिका के प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक पर कड़ा विरोध जताया

बीजिंग, 15 जुलाई । चीन ने रूस को निशाना बनाने वाले अमेरिका के प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा है कि वह अपने उद्यमों के वैध अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जायेंगे।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा, “चीन ऐसे अवैध एकतरफा प्रतिबंधों का कड़ा विरोध करता है जिनका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अधिकृत नहीं किया गया है।” उन्होंने कहा कि चीन ‘अपने उद्यमों और नागरिकों के वैध अधिकारों व हितों की दृढ़ता से रक्षा करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा।’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि उनका प्रशासन दिवंगत अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम के नेतृत्व वाले रूस प्रतिबंध विधेयक की समीक्षा कर रहा है और संसद से इसके पारित होने की पूरी संभावना है। इस विधेयक के संशोधित संस्करण में रूसी तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर लगने वाले अधिकतम आयात शुल्क को 500 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।

सांसदों ने इस विधेयक के मुख्य प्रायोजकों में से एक श्री ग्राहम के सम्मान में कांग्रेस से इसे जल्द से जल्द पारित करने का आग्रह किया है। यह कानून पिछले एक साल से अधिक समय से लंबित था।

अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने रूस प्रतिबंध विधेयक का एक संशोधित संस्करण पेश किया है, जिसके तहत भारत और चीन सहित रूसी तेल के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक का आयात शुल्क लगाने का प्रावधान है। यह कदम मूल प्रस्ताव में सुझाये गये 500 प्रतिशत के आयात शुल्क की तुलना में काफी नरम है।इस कानून के दायरे में स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान भी आते हैं।

इस विधेयक का उद्देश्य रूसी तेल एवं गैस के प्रमुख आयातकों पर दबाव बनाना है, साथ ही रूस के वित्तीय क्षेत्र, ऊर्जा उद्योग, रक्षा औद्योगिक आधार, वरिष्ठ अधिकारियों, कुलीन वर्गों तथा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर व्यापक प्रतिबंध लगाना है।

श्री ग्राहम ने अपनी मृत्यु से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को इस कानून को लेकर एक बड़ी सफलता की घोषणा की थी कि और कहा था कि सांसदों एवं राष्ट्रपति के कार्यालय के बीच इस विधेयक को आगे बढ़ाने पर सहमति बन गयी है। यदि 60 से अधिक पृष्ठों वाला यह ‘सेंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2026’ विधेयक पारित हो जाता है, तो यह रूसी नेताओं, कुलीन वर्गों, सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों और रूस के रक्षा औद्योगिक आधार का समर्थन करने वाली विदेशी कंपनियों पर अनिवार्य प्रतिबंध लागू कर देगा।

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