मानसून और मानसून सत्र के सक्रिय रहने से होगा देश का कल्याण-मोदी

मानसून और मानसून सत्र के सक्रिय रहने से होगा देश का कल्याण-मोदी

नयी दिल्ली, 20 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मानसून की तरह संसद का मानसून सत्र भी सक्रिय और उत्पादक रहने की आशा व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों ही सक्रिय होंगे तो देश का कल्याण होगा।श्री मोदी संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को संसद परिसर में कहा, “हम प्रार्थना करते हैं कि मानसून भी सक्रिय रहे और मानसून सत्र भी उत्पादक रहे। जब दोनों प्रोडक्टिव होते हैं तो देश का कल्याण होता है।” उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में भारत ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और अंतरिक्ष क्षेत्र में कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनसे हर देशवासी गर्व महसूस कर सकता है।

श्री मोदी ने कहा कि पिछले वर्ष मानसून सत्र से एक दिन पहले एक भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पहुंचा था और इस बार सत्र से दो दिन पहले ही एक भारतीय युवा स्टार्टअप ने अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि यह केवल संयोग नहीं बल्कि इस बात का संदेश है कि भारत के युवाओं की आकांक्षाएं और क्षमताएं अंतरिक्ष जितनी असीम हैं। उन्होंने कहा कि देश के स्टार्टअप में काम करने वाले युवाओं की औसत आयु करीब 28 वर्ष है और यही युवा भारत के भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार होकर आज देश चल पड़ा है. उसी का नतीजा है कि भारत के नौजवान इतना बड़ा साहस कर पाते हैं और सफल भी हो रहे हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों राजस्थान में बहुत बड़ी ऑयल रिफाइनरी देश को समर्पित की गई। कुछ सप्ताह पहले देश का तीसरा सेमीकंडक्टर प्लांट देश को समर्पित किया गया। अभी कुछ दिन पहले ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन देश को समर्पित की गई है। विश्व के बहुत कम देश ऐसे हैं, जिसके पास ये सुविधा है, लेकिन भारत ने जो हाइड्रोजन ट्रेन देशवासियों को समर्पित की है, वो सबसे ताकतवर इंजन वाली और सबसे लंबी है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत 7.7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जो देश की क्षमता और मजबूती का प्रमाण है।उन्होंने कहा कि देश ने विकास की गति पकड़ ली है और संसद का यह सत्र उस गति को और तेज करने का अवसर है। उन्होंने सभी दलों के सांसदों से सार्थक चर्चा करने, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और सदन को सुचारु रूप से चलाने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा, “जहां तथ्य और तर्क होते हैं, वहां तूफान के लिए जगह नहीं होती। आशा है कि यह सत्र तथ्य, तर्क और राष्ट्रहित की भावना के साथ आगे बढ़ेगा।”

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