
नयी दिल्ली, 25 जुलाई। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देश के छात्रों और युवाओं के संघर्ष की जीत बताते हुए कहा है कि यह केवल शुरुआत है और असली लड़ाई तो अभी बाकी है।पार्टी ने कहा कि पहली मांग मान ली गयी है और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के युवाओं से माफी मांगनी है। तीसरी मांग 20 जुलाई को छात्रों पर हुई हिंसा के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की और पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए कदम उठाने की है।कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने श्री प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि देश की युवा शक्ति ने उन्हें पद से हटाया है। छात्रों के आंदोलन, कांग्रेस के अभियान और विपक्ष के लगातार दबाव के कारण सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने श्री प्रधान के इस्तीफे को देश के युवाओं की जीत बताया और कहा कि कांग्रेस की प्रमुख मांगों में से एक पूरी हुई है।उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लंबे समय से प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा सुधार और शिक्षा व्यवस्था की खामियों का मुद्दा उठाते रहे हैं। ‘छात्रों की गूंज’ अभियान शुरू होने से पहले भी कांग्रेस इस मुद्दे पर आवाज उठा रही थी और आगे भी छात्रों के हितों तथा शिक्षा सुधार के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई और महिला कांग्रेस युवाओं के साथ खड़ी रहेगी।श्री खेड़ा ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश के युवाओं से माफी मांगनी होगी क्योंकि उनके शासन में युवाओं में निराशा और कुंठा पैदा हुई है। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान को इस कुंठा का केवल एक प्रतीक बताया और कहा कि कांग्रेस की लड़ाई पूरे शिक्षा तंत्र और पूरी व्यवस्था में सुधार की है।उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार सोशल मीडिया पर अपनी लोकप्रियता का जश्न मना रही है, जबकि देश का युवा शिक्षा, रोजगार और परीक्षा प्रणाली को लेकर परेशान है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा अंत नहीं, बल्कि जवाबदेही की शुरुआत है और संसद में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस आगे भी सरकार को घेरती रहेगी।