व्हाइट हाउस संवाददाता रात्रिभोज में ट्रंप की वापसी फीकी, प्रेस की स्वतंत्रता पर केन्द्र में रही बहस

व्हाइट हाउस संवाददाता रात्रिभोज में ट्रंप की वापसी फीकी, प्रेस की स्वतंत्रता पर केन्द्र में रही बहस

वाशिंगटन, 25 जुलाई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन (डब्ल्यूएचसीए) के वार्षिक रात्रिभोज में वापसी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रही।करीब एक घंटे तक चले उनके भाषण में उन्होंने पत्रकारों पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं, अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए पुराने उपनाम दोहराये और कई बार मोटापे पर आधारित चुटकुले सुनाये, जिन्हें श्रोताओं की ओर से खास प्रतिक्रिया नहीं मिली।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, एक समय श्री ट्रंप ने स्वयं भी स्वीकार किया कि उनके चुटकुले असर नहीं कर रहे हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से पूछा, “क्या किसी को यह सब समझ में आ रहा है?” जिस पर बहुत कम लोगों ने प्रतिक्रिया दी।श्री ट्रंप ने अपने संबोधन की शुरुआत में उस कानून-प्रवर्तन बल की सराहना की, जिसने हाल में उन पर हुए कथित हमले के प्रयास को विफल किया था। इसके बाद उन्होंने कई पत्रकारों को निशाने पर लिया, जिनमें सीएनएन की कैटलन कॉलिन्स और जेक टैपर तथा द वॉल स्ट्रीट जर्नल के जोश डॉसी शामिल थे।

उन्होंने सुश्री कॉलिन्स पर अपनी पुरानी टिप्पणी दोहराते हुए कहा कि वह ‘कभी मुस्कुराती नहीं हैं।’इससे पहले भी श्री ट्रंप ने यह टिप्पणी तब की थी, जब सुश्री कॉलिन्स ने उनसे दोषी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के पीड़ितों को न्याय दिलाने के बारे में सवाल पूछा था। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पहले कहा था कि श्री ट्रंप का भाषण ‘तीखा’ होगा। कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों और टिप्पणीकारों ने इसे अपेक्षाकृत नीरस बताया।

श्री ट्रंप ने दावा किया कि समाचार उद्योग उनकी वजह से ही चल रहा है। उन्होंने कहा, “मेरे जाने के बाद आप सब कंगाल हो जाएंगे।” उन्होंने यह शिकायत भी की कि न्यूयॉर्क टाइम्स के पहले पन्ने पर उनके बारे में प्रकाशित खबरों की संख्या गिनते हुए कहा कि “किसी को किसी और की परवाह नहीं है।”यह रात्रिभोज मूल रूप से 26 अप्रैल को आयोजित होना था, लेकिन वाशिंगटन हिल्टन होटल में एक बंदूकधारी के जबरन प्रवेश के प्रयास के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था। शुक्रवार को इसका पुनर्निर्धारित और अपेक्षाकृत छोटा आयोजन वाल्डोर्फ एस्टोरिया में किया गया।

यह इमारत श्री ट्रंप से भी जुड़ी रही है, क्योंकि उनके पहले कार्यकाल के दौरान यह उनके स्वामित्व वाले होटलों में से एक थी और अनौपचारिक राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र मानी जाती थी। श्री ट्रंप ने इस संदर्भ में झूमरों की ओर इशारा करते हुए मजाक किया, “इन खूबसूरत झूमरों को देखिए, मैं इनके बारे में सब कुछ बता सकता हूं।”राष्ट्रपति ने सीक्रेट सर्विस की सराहना करते हुए राजनीतिक हिंसा की निंदा की और कहा कि अमेरिका अपने मतभेदों का समाधान ‘गोलियों से नहीं, बल्कि खुली और सशक्त बहस से करता है।’ इसके तुरंत बाद उन्होंने मेहमानों के बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने पर चुटकी लेते हुए कहा कि कई लोगों ने इसे इसलिए नहीं पहना क्योंकि वे ‘10 किलोग्राम भारी दिखने’ से बचना चाहते थे।

कार्यक्रम के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि श्री ट्रंप मीडिया कवरेज पर करीबी नजर रखते हैं और आलोचनात्मक रिपोर्टिंग से असहज रहते हैं। उन्होंने सीएनएन के कई पत्रकारों का नाम लेकर उल्लेख किया, जिसके बाद सीएनएन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क थॉम्पसन ने नेटवर्क की पत्रकारिता का बचाव करते हुए कहा कि संविधान ईमानदार पत्रकारिता की रक्षा करता है और इसमें सरकारी हस्तक्षेप की कोई जगह नहीं है।इसके विपरीत श्री ट्रंप ने उन मीडिया हस्तियों की प्रशंसा की, जिन्हें वह अपना समर्थक मानते हैं। इनमें लैरी एलिसन और डेविड एलिसन शामिल हैं, जिनके नियंत्रण वाली पैरामाउंट कंपनी, सीएनएन की मूल कंपनी वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के अधिग्रहण का प्रयास कर रही है। कानूनी चुनौतियों के चलते पैरामाउंट ने शुक्रवार को इस सौदे में देरी करने पर सहमति जतायी।

श्री ट्रंप ने सीबीएस न्यूज की संपादक बारी वीस का भी व्यंग्यात्मक अंदाज में उल्लेख किया और अंत में उन्हें शुभकामनाएं दीं।कार्यक्रम के बाद श्री ट्रंप ने लाल रंग की ‘ट्रंप 2028’ टोपी भी पहनी, जिसे तीसरे कार्यकाल को लेकर चल रही बहस के बीच एक प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा गया। भाषण के दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि वह व्हाइट हाउस के बॉलरूम का उपयोग ‘करीब छह महीने’ ही कर पाएंगे, क्योंकि उसके बाद उन्हें पद छोड़ना होगा।

समारोह के अंत में डब्ल्यूएचसीए की निवर्तमान अध्यक्ष वेइजिया जियांग ने प्रेस की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए ट्रंप से कहा कि मीडिया की आलोचना करना और उसे कमजोर करने की कोशिश करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अमेरिकी संविधान का प्रथम संशोधन (फर्स्ट अमेंडमेंट) किसी भी तरह के समझौते का विषय नहीं हो सकता।

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