
नयी दिल्ली, 27 जुलाई । पर्यावरण कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने सोमवार को कहा कि एक बार फिर यह साबित हो गया है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अहिंसा और शांति का रास्ता 100 साल बाद भी प्रासंगिक है तथा आने वाले हज़ारों साल तक रहेगा।श्री वांगचुक ने सोमवार को यहां राजघाट पर गांधीजी को श्रद्धांजलि देने के बाद संवाददाताओं से कहा, “मैं सबसे पहले बापू को याद करने राजघाट आना और देश को बताना चाहता था कि उनका बताया गया रास्ता आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 100 साल पहले था। लोग कहते हैं कि ऐसे शासन के साथ ये तरीके नहीं चलते हैं। मुझे लगता है कि यह तरीका शासक से ज्यादा जनता के दिल तक संदेश पहुंचाता है।”
उल्लेखनीय है कि श्री वांगचुक ने नीट पेपर लीक तथा उसके बाद 22 अभ्यर्थियों की आत्महत्या पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 28 जून से यहां जंतर मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की थी। कुछ दिनों के बाद पुलिस ने श्री वांगचुक को वहां से हटाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया था। सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कुछ आश्वासन दिये जाने के बाद उन्होंने 26 दिन की भूख हड़ताल समाप्त की थी।
श्री वांगचुक ने कहा, “कोई भी शासक हों, वे जनता की सुनते हैं, चाहे मेरी न सुनें। मैंने गांधी जी के प्रयोग को एक बार फिर सफल होते देखा। इससे पहले लद्दाख में हम गांधी जी के इस प्रयोग का उपयोग करते आए हैं और उसे बहुत प्रासंगिक देखा, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भी यह प्रासंगिक होगा, यह मुझे मालूम नहीं था। आज मुझे तसल्ली हुई कि 100 साल बाद भी यह प्रासंगिक है।”
उन्होंने कहा, “मैं भारत और विश्व की जनता से यही कहूंगा कि वे बापू के दिखाये शांति के रास्ते पर ही चलें। इस रास्ते पर चलते हुए अगर खुद को पीड़ा दें, और दूसरे को पीड़ा न दें तो यह किसी भी कठोर से कठोर दिल को पिघला सकता है। मैं इस देश की युवा पीढ़ी को, सभी आम नागरिकों को और इस आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने वाले लोगों को बधाई देना चाहता हूं। मैं समझता हूं कि अगर कुछ उपलब्धि हासिल हुई है तो यह हमारी बाज़ुओं की ताकत से नहीं, बल्कि शांति की अपील से हुई है।”
शिक्षा मंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान के इस्तीफे से संबंधित सवाल होने पर श्री वांगचुक ने कहा कि उन्हें इसके बाद व्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद है, वरना इस्तीफे का कोई मतलब नहीं। भूल होने के बाद अगर बीमारी का इलाज हो तो हमारा देश एक बेहतर देश बनेगा।