अभी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म से कुछ दूर हूं: नीरज चोपड़ा

अभी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म से कुछ दूर हूं: नीरज चोपड़ा

ग्लासगो, (स्कॉटलैंड) 01 अगस्त। भारत के स्टार भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा का मानना है कि राष्ट्रमंडल खेल 2026 में जैवलिन थ्रो में रजत पदक जीतने के बाद भी वह अभी अपने सबसे अच्छे फॉर्म में लौटने से कुछ दूर हैं। राष्ट्रमंडल खेल में दो बार पदक जीतने वाले नीरज शुक्रवार को ग्लासगो में दूसरे स्थान पर रहे। उन्होंने सीज़न का अपना सबसे अच्छा थ्रो 85.83 मीटर का किया। वह श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज से पीछे रहे, जिन्होंने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता।मुकाबले के बाद नीरज ने कहा, “मैं यह नहीं कह सकता कि मेरी फिटनेस पहले जैसी हो गई है। मैं धीरे-धीरे उस स्तर तक पहुंच रहा हूं। चोट के बाद दोहा (जून में डायमंड लीग) मेरा पहला मुकाबला था, और कोई नहीं कह सकता था कि मैं तब पूरी तरह तैयार था। यहाँ मैं थोड़ा बेहतर था, लेकिन मैं आने वाले मुकाबलों के जरिए अपनी लय वापस पाने की कोशिश कर रहा हूं।”

भारतीय खिलाड़ी, जो लंबे समय तक चोट के कारण बाहर रहने के बाद इसी सीजन में मुकाबले में लौटे थे, ने कहा कि जब आप सबसे ऊंचे स्तर पर मुकाबला करते हैं तो तकनीक जितनी ही फिटनेस भी अहम भूमिका निभाती है।उन्होंने कहा, “ स्वर्ण पदक जीतने का कोई दबाव नहीं है। सबसे बड़ा फर्क तब होता है जब आप शतप्रतिशत फिट होते हैं। आपमें लड़ने का जज़्बा ज़्यादा होता है। आपको लगता है कि आप कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन जब आप चोट से वापसी कर रहे होते हैं, तो आपको हर कदम पर थोड़ा सावधान रहना पड़ता है। आज मैं सावधान था। कभी-कभी मैं पूरी ताकत से थ्रो करना चाहता था, और कभी-कभी हालात की वजह से कंट्रोल में रहना चाहता था। इसके बावजूद, थ्रो अच्छा था।”

नीरज ने मुश्किल मौसम को भी सभी खिलाड़ियों के लिए चुनौती भरा बताया। उन्होंने अपने 85.83 मीटर के थ्रो का ज़िक्र करते हुए कहा, “आज मेरा भी सिर्फ़ एक ही अच्छा थ्रो था। मुझे लगा कि बाकी थ्रो बेहतर हो सकते थे, लेकिन जैवलिन ठीक से उड़ नहीं पाया। मुझे लगा कि मैं और दूर तक फेंक सकता था, लेकिन भाला अपनी सही दिशा में नहीं जा रहा था। मैं ठंड में अपना बेस्ट प्रदर्शन नहीं कर पाता। मुझे गर्म मौसम पसंद है… क्योंकि मेरी रगों में भारतीय खून दौड़ता है।”28 साल के खिलाड़ी ने बताया कि आखिर में चैंपियन बने रुमेश थरंगा को खिताब जीतने के लिए सिर्फ़ एक सही थ्रो की ज़रूरत थी।

नीरज ने कहा, “सिर्फ़ एक अच्छा थ्रो काफी है। आज उनका एक थ्रो अच्छा था, और मेरा भी सिर्फ़ एक ही ठीक-ठाक थ्रो था।बेशक, अभी भी सुधार की गुंजाइश है। मैं यह नहीं कहूंगा कि मैंने इस सीज़न में बहुत ज़्यादा सुधार किया है। मैं और भी बेहतर कर सकता था। अब मकसद यही है कि आने वाली प्रतियोगिताओं में धीरे-धीरे सुधार करते रहें।”

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