
लखनऊ, 4 अगस्त। उत्तर प्रदेश लंबे समय से भारत में लंबी दूरी की दौड़ (डिस्टेंस रनिंग) की प्रतिभाओं की नर्सरी रहा है। राज्य ने पहली बार वर्ष 1989 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान तब बनाई, जब मऊ के बहादुर प्रसाद ने एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
बहादुर प्रसाद 1980 के दशक के उत्तरार्ध से लेकर 1990 के दशक के मध्य तक 1,500 मीटर से लेकर 10,000 मीटर तक भारत के शीर्ष धावक रहे। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक खिताब अपने नाम किए और भारतीय एथलेटिक्स में उत्तर प्रदेश की मजबूत पहचान स्थापित की।
इसके बाद वाराणसी के गुलाब चंद ने इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 1998 बैंकॉक एशियाई खेलों की 10,000 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर प्रदेश को एक और बड़ी उपलब्धि दिलाई। उन्होंने भी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई।
अब अलीगढ़ के गुलवीर सिंह उत्तर प्रदेश की इस समृद्ध विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। भारतीय सेना के धावक गुलवीर सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों में 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह राष्ट्रमंडल खेलों के एक ही संस्करण में एथलेटिक्स की दो स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने।
गुलवीर सिंह ने दोनों स्पर्धाओं में अपनी शानदार फिटनेस, लंबी दूरी की क्षमता और बेहतरीन रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन किया। अंतिम चरण में उनकी दमदार फिनिश ने उन्हें दोनों स्पर्धाओं में पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गुलवीर की यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत क्षमता और प्रतिभा को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि उत्तर प्रदेश आज भी भारतीय लंबी दूरी की दौड़ का सबसे मजबूत केंद्र बना हुआ है