उत्तर प्रदेश में पहली बार सिजेरियन और डबल हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट साथ-साथ

उत्तर प्रदेश में पहली बार सिजेरियन और डबल हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट साथ-साथ

लखनऊ, 6 अगस्त । संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ के चिकित्सकों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए गर्भवती महिला का अत्यंत जटिल संयुक्त ऑपरेशन सफलतापूर्वक कर उसकी और नवजात शिशु की जान बचाई है। संस्थान के अनुसार उत्तर प्रदेश में पहली बार तथा देश में चौथी बार सिजेरियन सेक्शन और डबल हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट की सर्जरी एक साथ सफलतापूर्वक की गई है।संस्थान के अनुसार पहली बार गर्भवती हुई 26 वर्षीय महिला को गर्भावस्था के 32वें सप्ताह में गंभीर रूमैटिक हार्ट डिजीज के कारण एसजीपीजीआई रेफर किया गया था। महिला को लगातार सांस लेने में तकलीफ और दिल की धड़कन तेज होने की शिकायत थी। जांच में गंभीर कैल्सिफिक एओर्टिक स्टेनोसिस, गंभीर माइट्रल रीगर्जिटेशन तथा मध्यम पल्मोनरी हाइपरटेंशन की पुष्टि हुई। चिकित्सकों के अनुसार गर्भावस्था जारी रहने या सामान्य प्रसव की स्थिति में मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के जीवन को गंभीर खतरा था।

मेटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ, कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी, कार्डियोलॉजी, कार्डियक एनेस्थिसियोलॉजी और नियोनेटोलॉजी विभागों के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद 21 जुलाई को सुनियोजित संयुक्त सर्जरी करने का निर्णय लिया। चिकित्सकों ने पहले सिजेरियन सेक्शन के माध्यम से 2.1 किलोग्राम वजन की स्वस्थ बच्ची का सुरक्षित जन्म कराया। इसके तुरंत बाद कार्डियो पल्मोनरी बाईपास की सहायता से ओपन हार्ट सर्जरी कर महिला के क्षतिग्रस्त एओर्टिक और माइट्रल दोनों हार्ट वाल्व सफलतापूर्वक बदल दिए। पूरी प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव रोकने तथा मरीज की स्थिति स्थिर बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की गई।सर्जरी के बाद महिला की रिकवरी संतोषजनक रही। कुछ ही घंटों में उसे सफलतापूर्वक एक्सट्यूबेट कर दिया गया तथा आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान किसी भी प्रकार के ब्लड प्रोडक्ट की आवश्यकता नहीं पड़ी। बाद में उसे प्रसवोत्तर देखभाल के लिए स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि नवजात शिशु भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में स्वस्थ है।

इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली टीम में मेटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ विभाग की डॉ. नीता सिंह, डॉ. मोनाली वी. खेरगाडे, डॉ. मंदाकिनी प्रधान तथा वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. अपराजिता, डॉ. प्रज्ञा और डॉ. साहिती शामिल रहीं। कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी विभाग से डॉ. एम. मुंशी, डॉ. शांतनु पांडे, डॉ. एस.के. अग्रवाल तथा वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. सौरभ त्रिपाठी और डॉ. विवेक ने योगदान दिया। एनेस्थिसियोलॉजी विभाग से डॉ. अमित रस्तोगी, डॉ. लाराब शेख, डॉ. श्रद्धा गांगेले, डॉ. सरबानी घोष और डॉ. शिवेंद्र प्रताप सिंह तथा कार्डियोलॉजी विभाग से डॉ. सत्येंद्र तिवारी, डॉ. रूपाली खन्ना और डॉ. हर्षित खरे टीम का हिस्सा रहे।संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन ने इस उपलब्धि पर पूरी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता एसजीपीजीआई की उन्नत, मरीज-केंद्रित और बहुविषयक चिकित्सा प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक जोखिम वाले मरीज में पहले सिजेरियन सेक्शन और उसके तुरंत बाद डबल हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट जैसी जटिल सर्जरी का सफल निष्पादन चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, परफ्यूजनिस्ट और अन्य सहयोगी कर्मचारियों की दक्षता, समन्वय और समर्पण को दर्शाता है।

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