गोकुल में होली की तरह मनाया गया नन्दोत्सव

गोकुल में होली की तरह मनाया गया नन्दोत्सव

मथुरा , 8 सितंबर । श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद अगले दिन कान्हा के गोकुल आने की खुशी में गोकुल का वातावरण हर्ष और उल्लास से उस समय और भर गया जब मन्दिरों में नन्दोत्सव का आयोजन किया गया।
जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह के अनुसार आज नन्दोत्सव मनाने के दौरान कहीं से किसी अप्रिय घटना होने का समाचार नही है।
नन्दोत्सव कार्यक्रम में मन्दिर के पुजारी यशोदा की भूमिका अदा करते हैं तथा कान्हा के गोकुल आने पर मिठाई, फल, खिलौने, वस्त्र आदि लुटाते हैं। कुछ ऐसा ही वातावरण आज गोकुल के राजा ठाकुर मन्दिर में देखने को मिला जहां खुशी से मन्दिर के मुखिया अरूण दर्शनार्थियों में उक्त सामग्री लुटा रहे थे और दूसरा पुजारी प्रसाद स्वरूप मन्दिर के जगमोहन से दर्शनार्थियों पर हल्दी मिश्रित दही छिड़क रहे थे। लगभग दो घंटे तक चले इस कार्यक्रम के बाद मन्दिर के पट दर्शनार्थियों के लिए बन्द हो गए तथा सभी लोग रास चबूतरा पर इकट्ठा हो गए।
कुछ समय के बाद नन्दभवन से श्यामाश्याम की सवारी गाजे बाजे के साथ रास चबूतरे पर जब पहुंची तो गोकुलवासी एवं पुजारी खुशी से झूम उठे। कुछ समय बाद ही धार्मिक भजनों की आवाज पर लोग नृत्य करने लगे तथा एक दूसरे के हल्दी मिश्रित दही लगाने लगे। लगभग दो घंटे बाद वातावरण होली की तरह उस समय बन गया जब नृत्य करते गोकुलवासी एक दूसरे को उक्त मिश्रण से भिगोने लगे और आरती के बाद कार्यक्रम का समापन हो गया।
आज कान्हा के गोकुल आने की खुशी में वहां का वातावरण खुशी से त्योहार जैसा बन गया था। गोकुल के हर घर में आज विशेष व्यंजन भी बनाए गए तथा शाम को दंगल का आयोजन किया गया।
नन्दोत्सव को दधिकाना भी कहा जाता है। आज मथुरा, रावल, वृन्दावन, गोवर्धन, महाबन आदि के मन्दिरों में भी दधिकाना धूमधाम से मनाया गया तथा दर्शकों में मिठाई, फल, कपडे़, खिलौने आदि लुटाए गए। इस प्रकार दो दिवसीय जन्माष्टमी समारोह का समापन हो गया। अब कई मन्दिरों में कान्हा की छठी मनाई जाएगी तो  जगह जगह रासलीला का आयोजन शुरू हो गया है।

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