
लखनऊ, 12 अगस्त। उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक संपत्तियों से अवैध कब्जे हटाने के लिए चलाए जा रहे एंटी भूमाफिया अभियान के तहत बीते साढ़े नौ वर्षों में 84,005 हेक्टेयर से अधिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। यह क्षेत्रफल करीब 2.08 लाख एकड़ के बराबर है। वहीं एंटी भूमाफिया पोर्टल पर मिली 4.34 लाख से अधिक शिकायतों में 99 प्रतिशत से ज्यादा का निस्तारण किया जा चुका है।सरकार का कहना है कि कब्जामुक्त कराई गई जमीन का इस्तेमाल विकास और निवेश से जुड़ी परियोजनाओं के लिए लैंडबैंक के रूप में किया जा सकेगा। राजस्व विभाग के अनुसार सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए राज्य, मंडल, जनपद और तहसील स्तर पर चार स्तरीय एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स गठित की गई है। इनका उद्देश्य अवैध कब्जों की पहचान, उनके खिलाफ कार्रवाई और भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाना है।
अवैध कब्जे से संबंधित शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कराने और कार्रवाई की निगरानी के लिए एंटी भूमाफिया पोर्टल विकसित किया गया है। पोर्टल पर अब तक 4,34,016 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 4,31,697 शिकायतों, यानी 99 प्रतिशत से अधिक का निस्तारण किया जा चुका है। वर्तमान में 2,319 शिकायतें लंबित हैं।राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि 84,005 हेक्टेयर से अधिक सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराना है। यह करीब 2.08 लाख एकड़ के बराबर है। सरकार के अनुसार इससे विभिन्न विकास योजनाओं के लिए बड़े स्तर पर भूमि उपलब्ध हो सकती है।
अभियान के तहत केवल प्रशासनिक स्तर पर ही कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 25,068 राजस्व वाद, 1,168 सिविल वाद और 4,751 एफआईआर दर्ज कराई गईं। वहीं 1,413 अतिक्रमणकर्ताओं को भूमाफिया के रूप में चिह्नित किया गया, जिनमें 144 वर्तमान में जेल में हैं।राजस्व विभाग के अनुसार विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की गई है। भारतीय दंड संहिता के तहत 1,621 मामले, दंड प्रक्रिया संहिता के तहत 109 लोगों, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत तीन, गैंगस्टर एक्ट के तहत 70, गुंडा एक्ट के तहत 206 तथा अन्य धाराओं के तहत 1,745 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
सरकार के अनुसार अतिक्रमण से मुक्त कराई गई सरकारी जमीन को व्यवस्थित तरीके से लैंडबैंक के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल औद्योगिक निवेश, बुनियादी ढांचे, फार्मास्युटिकल और विनिर्माण इकाइयों, लॉजिस्टिक पार्क, विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और अन्य बड़े निवेश प्रस्तावों के लिए किया जा सकता है।राजस्व विभाग का मानना है कि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध होने से निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और इसके माध्यम से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों तथा रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।