रेलवे डील के तहत भारत में बने 19 कोच की पहली खेप शीघ्र बंगलादेश पहुंचेगी

रेलवे डील के तहत भारत में बने 19 कोच की पहली खेप शीघ्र बंगलादेश पहुंचेगी

ढाका, 13 अगस्त । भारत में बने नयी पीढ़ी के ब्रॉड-गेज यात्री कोच की 19 कोच वाली पहली खेप दर्शना बॉर्डर से बंगलादेश में दाखिल होने वाली है और इसी के साथ ही एक दशक से ज़्यादा समय के बाद देश में भारतीय पैसेंजर कोच की सप्लाई फिर से शुरू हो रही है।पंजाब के कपूरथला में रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) में बने ये कोच, बंगलादेश रेलवे की 200 आधुनिक ब्रॉड-गेज यात्री कोच खरीदने की परियोजना के के तहत पहली खेप हैं। पहली खेप में तीन एसी स्लीपर कोच, तीन एसी चेयर कार, 11 नॉन-एसी चेयर कार और दो पावर कार शामिल हैं। आने से बंगलादेश के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में रेल सेवाओं, खासकर पद्मा रेल पुल से चलने वाली सेवाओं के मज़बूत होने की उम्मीद है। साथ ही इससे देश के पुराने हो रहे यात्री कोच बेड़े पर दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी।

दो सौ कोच वाला यह प्रोजेक्ट 2022 में शुरू किया गया था, जिसकी अनुमानित लागत 1,704.66 करोड़ टका (13 करोड़ 90 लाख डॉलर) है। इसमें से लगभग 1,331 करोड़ टका (10 करोड़ 80 लाख डॉलर) की राशि ईआईबी ऋण के ज़रिए होने की उम्मीद है।किसी भारतीय निर्माता से सीधे कोच खरीदने के बजाय बंगलादेश रेलवे ने एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी निविदा(इंटरनेशनल कॉम्पिटिटिव टेंडर) का रास्ता चुना। आरआईटीईएस लिमिटेड लगभग 11 करोड़12 लाख डॉलर ( भारतीय रुपये 915 करोड़) के प्रस्ताव के साथ सफल बोलीदाता के रूप में उभरी। यह अनुबंध 20 मई, 2024 को ढाका के रेल भवन में बंगलादेश रेलवे और आरआईटीईएस के बीच लगभग 1,205.54 करोड़ टका (9 करोड़ 80 लाख) की कीमत पर साइन किया गया था। इस परियोजना को बंगलादेश सरकार और यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक मिलकर फाइनेंस कर रहे हैं। समझौते के तहत आरआईटीईएस पर कोच की आपूर्ति करने के साथ-साथ डिज़ाइन, स्पेयर पार्ट्स और ट्रेनिंग से जुड़ी टेक्निकल मदद देने का दायित्व है। अनुबंध में आपूर्ति और कमीशनिंग के लिए 36 महीने का समय दिया गया है, जिसके बाद 24 महीने की वारंटी अवधि होगी।

मार्च 2022 में मंज़ूरी मिलने से लेकर मई 2024 में अनुबंध पर हस्ताक्षर होने तक इस प्रोजेक्ट में दो साल से ज़्यादा का समय लगा। उस समय प्रोजेक्ट निदेशक रहे ज़ैदुल इस्लाम ने इस देरी के लिए प्रोजेक्ट निदेशक और सलाहकार की नियुक्ति और यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक से मंज़ूरी हासिल करने जैसी समस्याओं का कारण बताया था।

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