कार्नी ने कनाडा के खिलाफ़ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की संभावना पर किया विचार

कार्नी ने कनाडा के खिलाफ़ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की संभावना पर किया विचार

ओटावा, 25 सितंबर। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कनाडा के खिलाफ़ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की सुदूर संभावना पर विचार किया है। यह जानकारी शुक्रवार को बीबीसी ने श्री कार्नी द्वारा’द न्यूयॉर्क टाइम्स’को दिए एक इंटरव्यू के हवाले से दी।

श्री कार्नी ने ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि उनके प्रशासन ने उस बेहद गंभीर जोखिम वाली स्थिति की सावधानी से जांच की है जिसमें अमेरिका उनके देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है और उसी के अनुसार तैयारी भी की है; हालांकि उन्होंने इस बारे में और कोई जानकारी नहीं दी।श्री कार्नी ने कहा, “मुझे लगता है कि इन भूमिकाओं में हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम बहुत कम संभावना वाले लेकिन बहुत गंभीर जोखिम पर भी ध्यान दें। यह बस रिस्क मैनेजमेंट है। यह कोई आम स्थिति नहीं है लेकिन इसके लिए तैयारी न करना गैर-ज़िम्मेदाराना होगा।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में पड़ोसी देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। अगर कोई टकराव होता है तो वह बहुत असंतुलित होगा। सरकारों के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी सेना में 20 लाख से ज़्यादा सक्रिय एवं रिज़र्व सैनिक हैं जबकि कनाडा के पास दो लाख से भी कम सैनिक हैं। इसी तरह, 2024 तक अमेरिका के पास 65 सैन्य सबमरीन थीं जबकि कनाडा के पास सिर्फ़ चार थीं।हालांकि कनाडा की तटरेखा दुनिया में सबसे लंबी है और यह आर्कटिक के करीब है; इन्हीं दो कारणों से श्री कार्नी ने पद संभालने के बाद से रक्षा खर्च बढ़ाने का फैसला किया है।

राष्ट्रपति ट्रंप अक्सर कनाडा को 51वां राज्य बताते रहे हैं। उन्होंने कनाडा के साथ व्यापार युद्ध भी शुरू किया था जो पिछले महीने और गहरा गया क्योंकि दोनों देशों ने कई उत्पादों पर एक-दूसरे के खिलाफ़ टैरिफ़ लगाने शुरू कर दिए। श्री कार्नी ने बताया कि तब से लेकर अब तक वह श्री ट्रंप से अक्सर बात करते रहे हैं।उन्होंने मीडिया आउटलेट से कहा, “मेरे नज़रिए से, हमारे बीच अच्छे संबंध हैं; हम फ़ोन उठाकर किसी भी मुद्दे पर एक-दूसरे से बात कर सकते हैं। वह साफ़-साफ़ बात करते हैं। मैं भी अपनी स्थिति के बारे में साफ़-साफ़ बात करता हूं। इस तरह काम ज़्यादा बेहतर ढंग से होता है और यह बात बनी हुई है और आगे भी बनी रहेगी।”श्री कार्नी ने कहा कि उन्हें लगता है कि अमेरिका के साथ व्यापार बातचीत फिर से शुरू करने का रास्ता अभी भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच दोस्ताना रिश्ते बहाल होना फायदेमंद होगा।

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