
गाले, 14 अगस्त। भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल ने शुक्रवार को बेंगलुरु में टीम प्रबंधक और बीसीसीआई सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (सीओई) के बीच बातचीत में कमी की खबरों को साफ तौर पर खारिज करते हुए कहा कि श्रीलंका के खिलाफ ऐतिहासिक 600वें टेस्ट से पहले चोटिल खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर दोनों पक्ष लगातार संपर्क में थे।यह स्पष्टीकरण तब आया जब भारत की टीम में चुने गए तीन खिलाड़ी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से बाहर हो गए, जिससे टीम मैनेजमेंट और बेंगलुरु स्थित सीओई के बीच तालमेल को लेकर अटकलें शुरू हो गईं।
गिल ने पहले टेस्ट से एक दिन पहले कहा, “उनके साथ लगातार बातचीत हो रही है। दुर्भाग्य से साई सुदर्शन में उतनी सुधार नहीं हुई जितनी हम चाहते थे, क्योंकि हम टेस्ट में जोखिम नहीं ले सकते। लेकिन हमें अपनी 15 खिलाड़ियों की टीम पर भरोसा है।”गिल ने स्पष्ट किया कि पूरी तरह से फिट न होने वाले खिलाड़ियों को बाहर रखने का भारत का फ़ैसला सोच-समझकर लिया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि टेस्ट क्रिकेट की जरूरतों को देखते हुए चोट से उबर रहे खिलाड़ियों को मैदान पर उतारना जोखिम भरा हो सकता है।
उन्होंने कहा, “टेस्ट मैच पांच दिन का होता है। अगर यह वनडे या टी-20 होता, तो बात अलग होती। लेकिन टेस्ट मैच में आप जोखिम नहीं लेना चाहते।”कप्तान ने माना कि साई सुदर्शन और जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति निराशाजनक है, लेकिन कहा कि इन झटकों से टीम का आत्मविश्वास कम नहीं हुआ है।
गिल ने कहा, “मुझे लगता है कि हमारी 15 खिलाड़ियों की टीम में जो भी है या जिसे भी हम किसी भी स्थिति में अपनी प्लेइंग 11 में मौका देते हैं, वे अच्छा खेल सकते हैं और मैच जीत सकते हैं।”वॉशिंगटन सुंदर के अभी भी चोट से उबरने के कारण, रवींद्र जडेजा सीरीज की शुरुआत में भारत के एकमात्र ऑलराउंडर होंगे। गिल ने युवा मानव सुथार का भी समर्थन किया और कहा कि मौका मिलने पर वे बल्ले और गेंद दोनों से योगदान दे सकते हैं। गिल ने कहा कि सुथार में एक उपयोगी नंबर 8 बल्लेबाज बनने की क्षमता है, साथ ही वे अच्छी गेंदबाजी का विकल्प भी दे सकते हैं।
चोट की समस्याओं के बावजूद, गिल ने कहा कि भारत ने सीरीज के लिए पर्याप्त तैयारी की है। पिछले महीने कई खिलाड़ियों ने इंडिया ए के मैचों में हिस्सा लिया, जबकि कई मुख्य खिलाड़ियों को पिछले सप्ताह एसएलसी इलेवन के ख़िलाफ मैच के दौरान श्रीलंकाई हालात के हिसाब से ढलने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि टेस्ट मैच से पहले काफ़ी समय मिलना बहुत ज़रूरी है, खासकर तब जब खिलाड़ियों को वहां के हालात का ज़्यादा अनुभव न हो।गिल ने कहा, “अगर कार्यक्रम में टेस्ट मैच शुरू होने से पहले कम से कम एक हफ़्ता या 10 दिन का समय मिलता है, तो इससे तैयारी में जाहिर तौर पर मदद मिलती है।”
उन्होंने कहा कि इंग्लैंड दौरे, एशिया कप और उसके बाद के टेस्ट मैचों सहित भारत के व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर की वजह से हालात के हिसाब से ढलना मुश्किल हो गया था, इसलिए श्रीलंका में तैयारी का समय और भी अहम हो गया है। पहला टेस्ट ऐतिहासिक रूप से भी अहम होगा, क्योंकि भारत अपना 600वां पुरुष टेस्ट मैच खेलने जा रहा है और टेस्ट क्रिकेट में एक खास मुकाम हासिल करेगा।