
लखनऊ, 15 अगस्त (वार्ता) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विधान भवन के बाहर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले विभिन्न राज्यों के कलाकारों से अपने सरकारी आवास पर संवाद किया और उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने गायकों से कहा कि आप गा सकते हैं, मैं गा नहीं सकता, लेकिन गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं।योगी ने कहा कि भारत की विविधता में एकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है तथा कलाकार देश की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के वास्तविक वाहक हैं। मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से आए कलाकारों से उनके अनुभव साझा किए तथा प्रदेश में भ्रमण की उनकी इच्छाओं के बारे में जानकारी ली। कई कलाकारों ने अयोध्या और लखनऊ घूमने की इच्छा जताई, जिस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय को अपने देश की विविध संस्कृति, परंपराओं और विरासत को जानने का प्रयास करना चाहिए। कलाकार विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति को एक-दूसरे तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं और यही सांस्कृतिक आदान-प्रदान राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ बनाता है।संवाद के दौरान छत्तीसगढ़ के कलाकार कुलभूषण चंद्राकर ने कहा कि उनके प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी को ‘बुलडोजर बाबा’ के नाम से जाना जाता है। इस पर मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा, “आप गा सकते हैं, मैं गा नहीं सकता, लेकिन गलत लोगों पर बुलडोजर तो चलवा ही सकता हूं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” का सपना तभी साकार होगा, जब देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग एक-दूसरे की संस्कृति, परंपरा और जीवन शैली को समझेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता के साथ-साथ सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।जम्मू-कश्मीर से पहली बार उत्तर प्रदेश आईं कलाकार श्रुति ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दर्शन की इच्छा व्यक्त की, जिस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए। वहीं गुजरात, बिहार, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से आए कलाकारों से भी उन्होंने उनके सांस्कृतिक अनुभवों पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कलाकार केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और लोक संस्कृति के संवाहक होते हैं। उनकी प्रस्तुतियों में अतीत की स्मृतियां और भविष्य की प्रेरणा निहित होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार दीपोत्सव, रंगोत्सव, जन्माष्टमी, माघ मेला और आल्हा महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से लोक परंपराओं को नई पहचान दे रही है। हर क्षेत्र और जनपद में सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित होने चाहिए, ताकि स्थानीय कलाकारों को मंच मिल सके और लोक संस्कृति अगली पीढ़ी तक पहुंच सके।कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के कलाकारों ने रउफ और डोंगरी नृत्य, महाराष्ट्र ने नमन एवं डिंडी, अरुणाचल प्रदेश ने पराई, त्रिपुरा ने डारलॉन्ग, बिहार ने झिंझिया, मध्य प्रदेश ने गुदुमबाजा, गुजरात ने तलवार रास, छत्तीसगढ़ ने रेला पाटा तथा उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने कथक की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया।
मुख्यमंत्री ने सभी कलाकारों और कोरियोग्राफरों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। कलाकारों ने उत्तर प्रदेश में मिले सम्मान, बेहतर व्यवस्थाओं तथा अयोध्या और काशी में दर्शन की सुविधाओं की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।