
नयी दिल्ली, 18 अगस्त । उच्चतम न्यायालय ने मौत की सजा के निष्पादन के लिए फांसी की प्रक्रिया को हटाने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया है लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इस मुद्दे पर पुनर्विचार का रास्ता खुला रहेगा
पीठ ने मंगलवार को कहा कि उसका यह फैसला केंद्र सरकार के एक विशेषज्ञ समिति के गठन के रास्ते में आड़े नहीं आएगा। केंद्र सरकार निष्पादन प्रक्रिया का व्यापक मूल्यांकन करने के लिए विशेषज्ञ पैनल बना सकती है और इस बात पर विचार कर सकती है कि क्या कोई वैकल्पिक तरीका मानवीय गरिमा की संवैधानिक आवश्यकता को बनाए रखते हुए दर्द और पीड़ा को कम कर सकता है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 354(5) को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर अपना फैसला सुनाया। यह धारा फांसी की प्रक्रिया से मृत्युदंड को निष्पादित करने का प्रावधान करती है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा की इस याचिका में फांसी के स्थान पर जहरीले इंजेक्शन, गोली मारने, बिजली के झटके देने या गैस चैंबर जैसे तरीकों को अपनाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि फांसी की प्रक्रिया से अत्यधिक दर्द और लंबे समय तक पीड़ा होती है।