यूपी-जापान ग्रीन हाइड्रोजन सहयोग को मिली नई दिशा, पायलट परियोजना का प्रस्ताव

यूपी-जापान ग्रीन हाइड्रोजन सहयोग को मिली नई दिशा, पायलट परियोजना का प्रस्ताव

लखनऊ, 21 अगस्त। उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने की दिशा में शुक्रवार को महत्वपूर्ण पहल हुई। गोमती नगर स्थित ताज होटल में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 के दौरान उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के बीच ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक, अनुसंधान और निवेश को लेकर सहयोग पर चर्चा हुई। इस अवसर पर दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी हुआ।बैठक में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा, ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में आए उच्चस्तरीय जापानी प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसके उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने से उत्तर प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी तथा जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल उद्योगों, भारी वाणिज्यिक वाहनों, उर्वरक निर्माण समेत कई क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए किया जा सकता है। राज्य सरकार तकनीकी नवाचार और निजी निवेश के जरिए इस क्षेत्र में मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।बैठक में जापानी प्रतिनिधिमंडल ने यामानाशी की पावर-टू-गैस (पी2जी) तकनीक का प्रस्तुतीकरण किया। इस तकनीक में नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल कर जल के इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाता है।

यामानाशी हाइड्रोजन कंपनी और कानाडेविया कॉरपोरेशन के सहयोग से उत्तर प्रदेश में उच्च क्षमता वाली पायलट परियोजना स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव के अनुसार परियोजना की फिजिबिलिटी स्टडी फरवरी 2027 तक पूरी करने और मार्च 2027 तक व्यावसायीकरण की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य है।उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में प्रति वर्ष 10 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए निवेश, तकनीकी नवाचार और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत परियोजनाओं के लिए विभिन्न प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इनमें परियोजना लागत पर 10 से 30 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में 100 प्रतिशत तक छूट तथा निजी विकासकर्ताओं के माध्यम से भूमि लीज पर उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी-बीएचयू वाराणसी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से नई तकनीकों के विकास, अनुसंधान, तकनीकी परीक्षण और प्रयोगशाला स्तर की तकनीकों को औद्योगिक स्तर पर विकसित करने में मदद मिलेगी।ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और मजबूत कनेक्टिविटी इसे ग्रीन हाइड्रोजन निवेश के लिए आकर्षक बनाती है। राज्य में एक्सप्रेसवे, रेलवे, मेट्रो, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, अंतर्देशीय जलमार्ग और हवाई संपर्क जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।

इनके जरिए ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और औद्योगिक उपयोग के लिए मजबूत सप्लाई चेन विकसित की जा सकती है। प्रदेश के बड़े औद्योगिक आधार और भारी परिवहन क्षेत्र को देखते हुए हाइड्रोजन मोबिलिटी में भी व्यापक संभावनाएं हैं।अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों के लिए सुरक्षित और संभावनाओं से भरपूर निवेश गंतव्य के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में जापान की तकनीक, विशेषज्ञता और निवेश का स्वागत करते हुए परियोजनाओं के क्रियान्वयन में हरसंभव नीतिगत एवं प्रशासनिक सहयोग का आश्वासन दिया।

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 के दौरान हुआ यह समझौता प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, तकनीकी नवाचार, अनुसंधान, औद्योगिक निवेश और स्वच्छ ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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