
लखनऊ, 21 अगस्त। उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के बीच आर्थिक, पर्यटन और रोजगार संबंधों को नई गति देने के लिए यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट में तीन महत्वपूर्ण समझौतों (एमओयू) का आदान-प्रदान किया गया। इन समझौतों का मुख्य फोकस उत्तर प्रदेश के युवाओं को जापान में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, पर्यटन को बढ़ावा देने और जापानी भाषा में दक्ष मानव संसाधन तैयार करने पर रहा।पहला एमओयू इन्वेस्ट यूपी और जापान टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर (टीटीआरसी) के बीच हुआ। उत्तर प्रदेश की ओर से अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार और जापानी पक्ष से टीटीआरसी के निदेशक सुचकी कमाडा ने समझौते का प्रतिनिधित्व किया। कार्यक्रम में बताया गया कि टीटीआरसी के प्रयासों से अब तक उत्तर प्रदेश के 100 से अधिक युवाओं को जापान में रोजगार मिल चुका है।
इस अवसर पर जापान में रोजगार हासिल करने वाले उत्तर प्रदेश के दो युवाओं पुष्पेंद्र सिंह चौहान और आदर्श कुमार कुशवाहा को मंच पर प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। उनकी सफलता को दोनों देशों के बीच बढ़ते कौशल विकास और रोजगार सहयोग का उदाहरण बताया गया। दूसरा एमओयू उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग और यामानाशी प्रीफेक्चर के बीच हुआ। इसका उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने और पर्यटन क्षेत्र में निरंतर सहयोग विकसित करना है।उत्तर प्रदेश की ओर से पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात तथा जापानी पक्ष से यामानाशी सरकार के संस्कृति, पर्यटन एवं खेल विभाग के महानिदेशक योशी यूकी कोजुमी ने समझौते का आदान-प्रदान किया। इस सहयोग से उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक, बौद्ध, सांस्कृतिक और हेरिटेज पर्यटन को जापानी पर्यटकों के बीच बढ़ावा देने की संभावनाएं मजबूत होंगी। साथ ही दोनों पक्ष एक-दूसरे के पर्यटन संसाधनों और संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने के लिए निरंतर संवाद और गतिविधियां कर सकेंगे।
तीसरा एमओयू उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन विभाग और यामानाशी प्रीफेक्चर के बीच हुआ। इसका उद्देश्य जापानी भाषा में दक्ष मानव संसाधन तैयार कर उनकी जापान में रोजगार के अवसरों से निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। उत्तर प्रदेश की ओर से श्रम एवं सेवायोजन विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. एमके शनमुखा सुंदरम और जापानी पक्ष से यामानाशी प्रीफेक्चर सरकार के इनोवेशन प्रमोशन ब्यूरो के महानिदेशक कत्सुया हादा ने समझौते का प्रतिनिधित्व किया।एमओयू के तहत युवाओं को जापानी भाषा और रोजगारोन्मुख कौशल में प्रशिक्षित करने पर जोर रहेगा। इससे एक ओर उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए जापान में रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे, वहीं दूसरी ओर जापानी कंपनियों को प्रशिक्षित और भाषा-दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
तीनों समझौतों को उत्तर प्रदेश और जापान के बीच संबंधों को केवल निवेश तक सीमित रखने के बजाय रोजगार, कौशल, पर्यटन और मानव संसाधन विकास के दीर्घकालिक सहयोग में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।