
वाशिंगटन, 25 अगस्त। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अगली पीढ़ी का अंतरिक्ष वेधशाला नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप रविवार को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा। करीब चार अरब डॉलर की लागत वाली इस परियोजना का इस्तेमाल वैज्ञानिक डार्क एनर्जी और डार्क मैटर समेत ब्रह्मांड के कई बड़े रहस्यों को समझने के लिए करेंगे।
नासा के अनुसार, रोमन को स्पेसएक्स के फाल्कन हेवी रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा जायेगा। एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक इसका प्रक्षेपण निर्धारित समय से करीब नौ महीने पहले किया जा रहा है।
रोमन को हबल स्पेस टेलीस्कोप और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के बाद विकसित किया गया है। हबल को 1990 में और वेब को 2021 में लॉन्च किया गया था। दोनों दूरबीनें अभी भी काम कर रही हैं। रोमन अपनी व्यापक दृश्य क्षमता और तेज गति से अंतरिक्ष का सर्वेक्षण करने की क्षमता के जरिये वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की संरचना, संघटन और विकास का पहले से अधिक विस्तृत अध्ययन करने में मदद करेगा।
वैज्ञानिकों के अनुसार, करीब 13.8 अरब वर्ष पहले बिग बैंग के बाद से ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है। वर्ष 1998 में पता चला था कि यह विस्तार तेज हो रहा है। इसके पीछे एक अदृश्य शक्ति डार्क एनर्जी को संभावित कारण माना जाता है।
ब्रह्मांड में सामान्य पदार्थ के अलावा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी मौजूद हैं, जिनकी वास्तविक प्रकृति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अनुमान के अनुसार सामान्य पदार्थ ब्रह्मांड का करीब पांच प्रतिशत, डार्क मैटर करीब 27 प्रतिशत और डार्क एनर्जी करीब 68 प्रतिशत हिस्सा है।
रोमन का एक प्रमुख उद्देश्य हमारे सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रहों यानी एक्सोप्लैनेट की खोज करना भी होगा। अब तक 6,350 से अधिक एक्सोप्लैनेट खोजे जा चुके हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि रोमन हजारों नए एक्सोप्लैनेट खोजेगा और हमारे जैसे ग्रह प्रणालियों का पहला व्यापक सांख्यिकीय आकलन उपलब्ध कराएगा। यह कुछ अपेक्षाकृत नजदीकी एक्सोप्लैनेट की सीधे तस्वीर लेने वाली नई तकनीक का भी प्रदर्शन करेगा।प्रक्षेपण के बाद रोमन पृथ्वी से करीब 16 लाख किलोमीटर दूर लैग्रेंज प्वाइंट-2 की ओर जाएगा। यह दूरी पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से करीब चार गुना है। जेम्स वेब भी इसी क्षेत्र में स्थित है, जबकि हबल पृथ्वी की निचली कक्षा में है।रोमन का प्राथमिक मिशन पांच वर्ष के लिए निर्धारित है, हालांकि नासा के अनुसार उसमें पांच वर्ष और काम करने के लिए पर्याप्त ईंधन हो सकता है। इस दूरबीन का नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री नैन्सी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है। वर्ष 2018 में 93 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ था।