
नयी दिल्ली, 27 अगस्त । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो ) ने 25 अगस्त को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद उस क्षेत्र की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की हैं।इसरो की ओर से जारी की गई तस्वीरों से नेपाल-तिब्बत सीमा के पास त्रिशूली नदी से सटे एक ग्लेशियर की सतह में आये बदलावों का पता चला है। इसरो के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) के शुरुआती विश्लेषण में तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर के बड़े पैमाने पर टूटने की घटना को चित्रित किया गया है। माना जाता है कि इसी वजह से विनाशकारी अचानक बाढ़ आयी थी।
इसरो की ओर से जारी ‘पहले और बाद’ की सैटेलाइट तस्वीरों में उस ग्लेशियर पर बड़े बदलाव दिखाई देते हैं, जहाँ से बाढ़ का पानी आने की आशंका है। इस विश्लेषण में त्रिशूली और भोटेकोशी नदी प्रणालियों के पास ग्लेशियर की सतह में आये बदलावों को मैप करने के लिए सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती विश्लेषण के अनुसार, घटना की शुरुआत बर्फ और चट्टानों के खिसकने या भूस्खलन से हुई, जिससे नदी का बहाव कुछ समय के लिए रुक गया। इसके बाद, जमा हुआ पानी और मलबा अचानक बह निकला, जिससे अचानक बाढ़ आ गई और त्रिशूली नदी प्रणाली में भारी मात्रा में मलबा बहने लगा।
बर्फ़ के तूफ़ान (एवलांच) की तस्वीरें इसरो ने ‘रिसोर्ससैट-2ए’ सैटेलाइट से लीं, जो धरती पर नज़र रखने और रिमोट-सेंसिंग का काम करने वाला सैटेलाइट है। सैटेलाइट की तस्वीरों में त्रिशूली नदी के पास ग्लेशियर के नज़दीक ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर उथल-पुथल, भोते कोशी नदी का जलस्तर बढ़ना और नदी के निचले इलाकों में भारी बाढ़ के निशान दिखाई दे रहे हैं।गौरतलब है कि एनआरएससी रिमोट-सेंसिंग सैटेलाइट डेटा हासिल करने और उसे जारी करने, डेटा बांटने, हवाई रिमोट-सेंसिंग और आपदा प्रबंधन के लिए फ़ैसले लेने में मदद करने का काम करता है।
तिब्बत से निकलने वाली त्रिशूली नदी, मध्य नेपाल में नारायणी नदी प्रणाली की एक मुख्य सहायक नदी है और व्हाइट-वॉटर राफ़्टिंग के लिए मशहूर जगह है। नेपाल से निकलने वाली नदियां आख़िरकार भारत में गंगा नदी से लगे क्षेत्रों में बहती हैं। बुधवार को नेपाल अचानक आई ज़बरदस्त बाढ़ की चपेट में आ गया, जिससे भारी तबाही हुई। अनेकों लोगों की मौत हो गयी और हजारों लोग अभी भी लापता हैं। देश के उत्तरी हिस्सों पर इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ा, जिसमें चीन-नेपाल सीमा पर स्थित रसुवा ज़िला सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है। बाढ़ का शुरुआती ज़ोर भले ही गुज़र गया हो, लेकिन अधिकारी दोबारा बाढ़ आने और दूसरे खतरों को लेकर हाई अलर्ट पर हैं। जानकारों का कहना है कि मलबे और बर्फ़ के तूफ़ान से अस्थायी बांध बन गए हैं, जिनसे अचानक दोबारा बाढ़ का पानी बढ़ सकता है।