
नयी दिल्ली, 27 अगस्त । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ओलंपिक खेलों में भागीदारी बढ़ाने और ओलंपिक 2036 के लिए तैयारी अभी से शुरू करने का आह्वान करते हुए कहा कि देश का खेल विजन केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘विकसित भारत’ के निर्माण में खेल और युवाओं की ताकत का उपयोग करने के एक बड़े मिशन का हिस्सा है।
श्री मोदी ने यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ को संबोधित करते हुए खेल, युवा नेतृत्व, फिटनेस, नागरिक जिम्मेदारी और राष्ट्र-निर्माण पर देशव्यापी चर्चा के तहत देशभर के युवाओं से बातचीत की। ‘मेरा युवा भारत’ द्वारा राष्ट्रीय खेल दिवस समारोह के हिस्से के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं को भारत की खेल यात्रा से जुड़ने, अपनी उम्मीदें साझा करने और देश के युवा और खेल अर्थव्यस्था को मजबूत करने के लिए विचार देने का मंच प्रदान करना है। इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भागीदारी हो रही है, जिसमें प्रत्येक जिले के दो कॉलेजों के छात्र हिस्सा ले रहे हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान लाल किले की प्राचीर से भारत के व्यापक खेल विजन की रूपरेखा बताई थी।उन्होंने कहा, “जब मैं खेल की बात करता हूं, तो यह केवल पदक जीतने के बारे में नहीं है। यह एक विकसित भारत के निर्माण में भारत की खेल शक्ति और युवा शक्ति को एक साथ लाने का अभियान है।”
भारत के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय खेलों में प्रतिस्पर्धा करने की जरूरत पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने ऐतिहासिक रूप से ओलंपिक में शामिल लगभग आधी प्रतियोगिताओं में भाग नहीं लिया है। ऐसा दशकों से चला आ रहा है।
उन्होंने कहा, “दूसरे देश उन खेलों में पदक जीतते हैं जिनमें हम भाग भी नहीं लेते। अगर हम अपनी पदक तालिका को बढ़ाना चाहते हैं, तो हमें उन खेलों में भी महारत हासिल करनी होगी।ओलंपिक में शामिल कई अलग-अलग खेलों में से, भारतीय टीमें लगभग आधे खेलों में भाग नहीं लेती हैं। इसका मतलब है कि हम पदक तालिका के एक बहुत बड़े हिस्से के लिए प्रतिस्पर्धा भी नहीं करते हैं। यह दशकों से चला आ रहा है।”
प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि 2036 ओलंपिक की तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर भारत को ग्लोबल स्पोर्ट्स के मंच पर अपनी मजबूत छाप छोड़नी है, तो लंबी अवधि की योजना, शुरुआती दौर में ही प्रतिभा की पहचान और खिलाड़ियों को लगातार सहयोग देना जरूरी है।
उन्होंने कहा, “जब हम 2036 ओलंपिक की बात करते हैं, तो हमें अभी से खिलाड़ियों को तैयार करना शुरू करना होगा।खेलो इंडिया देश भर में स्पोर्ट्स प्रतिभा को निखारने का एक शानदार मंच बन गया है। यह युवा खिलाड़ियों को उनके सपने पूरे करने के लिए मौके और सपोर्ट दे रहा है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्पोर्ट्स का महत्व केवल चैंपियन बनाने से कहीं अधिक है, क्योंकि स्पोर्ट्स प्रतिस्पर्धा युवाओं को मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत, अनुशासन और हार के बाद फिर से उठने की क्षमता सिखाते हैं।
उन्होंने कहा, “खेल हमें केवल चैंपियन बनना ही नहीं सिखाता, बल्कि बेहतर प्रतियोगी बनना भी सिखाता है। गिरना, उठना और फिर गिरने के बाद दोबारा उठना — खेल हमारे अंदर यही जज़्बा पैदा करता है।”आज की स्क्रीन-बेस्ड दुनिया में युवाओं के बीच शारीरिक गतिविधि पर ज़्यादा ज़ोर देते हुए श्री मोदी ने कहा कि खेलों की सुविधाओं और खुली जगहों को अधिक अहमियत दी जानी चाहिए।उन्होंने कहा, “स्क्रीन से अधिक जरूरी स्पोर्ट्स सेंटर हैं। प्ले-स्टेशन से ज्यादा जरुरी खेल के मैदान हैं।”
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि स्पोर्ट्स ड्रग्स की लत (खासकर युवाओं में) से निपटने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि ये उन्हें एक पॉजिटिव रास्ता, अनुशासन और जीवन का मकसद देते हैं।
उन्होंने कहा, “ड्रग्स की लत की समस्या से निपटने में स्पोर्ट्स बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं।”उन्होंने भारत के पैरा-एथलीटों की भी तारीफ की और कहा कि उनकी उपलब्धियां स्पोर्ट्स की ज़िंदगी बदलने वाली ताकत को दिखाती हैं और व्यक्तिगत प्रेरणा का स्रोत रही हैं।श्री मोदी ने कहा, “हमारे पैरा-एथलीट इस बात का उदाहरण हैं कि स्पोर्ट्स कैसे ज़िंदगी बदल सकते हैं। मुझे उनसे प्रेरणा मिली है।”