
सहारनपुर, 28 अगस्त। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सहारनपुर में छह सितंबर को प्रस्तावित अपनी रैली स्थगित कर दी है। पार्टी की ओर से इसके पीछे बारिश के मौसम को वजह बताया गया है, हालांकि राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) अध्यक्ष जयंत चौधरी के साथ हालिया सियासी तनातनी के बीच रैली स्थगित किए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं।श्री यादव की प्रस्तावित रैली के आयोजक एवं पूर्व सांसद चौधरी यशपाल सिंह के पुत्र सपा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रुद्रसैन और चौधरी इंद्रसैन ने शुक्रवार को बताया कि बारिश के मौसम को देखते हुए सभा का आयोजन टाल दिया गया है। उनके अनुसार, अखिलेश यादव के बुलावे पर इंद्रसैन लखनऊ गए थे, जहां रैली स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
वहीं, सपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं एमएलसी राजेंद्र चौधरी ने कहा कि उन्हें अखिलेश यादव की रैली स्थगित किए जाने की जानकारी नहीं है। हालांकि, अखिलेश यादव दो सितंबर को सहारनपुर में चौधरी इंद्रसैन के आवास पर भोजन के लिए पहुंचेंगे।गौरतलब है कि रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी की तीन सितंबर को रामपुर मनिहारान स्थित गोचर कृषि इंटर कॉलेज में स्वाभिमान सभा प्रस्तावित है। रालोद महासचिव एवं बिजनौर सांसद चंदन चौहान सभा की तैयारियों में जुटे हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अखिलेश यादव की सहारनपुर रैली की तारीख उस समय तय हुई थी, जब जयंत चौधरी की सभा घोषित नहीं हुई थी। इसी दौरान अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी को लेकर ‘चवन्नी को रुपया’ बनाने संबंधी टिप्पणी की थी। जयंत चौधरी ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे जाट समाज का अपमान बताया था और सहारनपुर में सभा कर जवाब देने की बात कही थी। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच सियासी तनातनी की चर्चाएं तेज हो गई थीं।योजना आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. डॉ. सुधीर पंवार ने कहा कि सितंबर में बारिश की संभावना बनी रहती है और कभी भी वर्षा हो सकती है, इसलिए रैली स्थगित करना व्यावहारिक निर्णय है। उन्होंने अखिलेश यादव के बयान को जाट समाज को लांछित करने वाला नहीं माना। उनका कहना है कि जयंत चौधरी पूरे जाट समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते और न ही जाट समाज को जयंत चौधरी के रूप में देखा जा सकता है।
हालांकि, राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि रैली स्थगित होने से जयंत चौधरी को राजनीतिक लाभ जरूर मिला है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं के समीकरण को देखते हुए माना जा रहा है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहते, जिससे सपा को इस क्षेत्र में राजनीतिक नुकसान उठाना पड़े।