
वाशिंगटन, 30 अगस्त। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने डार्क एनर्जी, ब्लैक होल और ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों की खोज के मकसद से अपने नए शक्तिशाली स्पेस टेलीस्कोप ‘नैन्सी ग्रेस रोमन’ को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की ओर रवाना कर दिया है। इस मिशन का एक मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या ब्रह्मांड में पृथ्वी के अलावा भी कहीं जीवन संभव है या अन्य ग्रह रहने योग्य हैं।
यह टेलीस्कोप या दूरबीन फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन हैवी रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष के लिए भेजा गया। नासा के अनुसार ‘रोमन टेलीस्कोप’ ब्रह्मांड को देखने के नजरिए को पूरी तरह बदल देगा। यह मिशन सैकड़ों नए ग्रहों की खोज कर सकता है।नैन्सी ग्रेस रोमन टेलीस्कोप का दायरा प्रसिद्ध हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में कम से कम 100 गुना बड़ा है। यह टेलीस्कोप फ्लोरिडा से उड़ान भरने के बाद पृथ्वी से लगभग 16 लाख किलोमीटर दूर स्थित अपने निर्धारित कक्षा की ओर बढ़ रहा है, जहां पहुंचने में इसे 100 दिनों का समय लगेगा। इसके बाद यह सौर मंडल के बाहर मौजूद ग्रहों की खोज और मैपिंग शुरू करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों को बधाई दी और उनके प्रयासों की सराहना की।
इस टेलीस्कोप का नाम प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी नैन्सी ग्रेस रोमन (1925-2018) के नाम पर रखा गया है, जिन्हें “मदर ऑफ हबल” भी कहा जाता है। वह 1960 के दशक में नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री और पहली महिला कार्यकारी थीं। उन्होंने हबल टेलीस्कोप को अमेरिकी कांग्रेस से मंजूरी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
नासा के अनुसार, यह टेलीस्कोप अपने 5 से 10 वर्षों के मिशन के दौरान डार्क मैटर, डार्क एनर्जी, ब्लैक होल और अरबों आकाशगंगाओं का अध्ययन करेगा। डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की उत्पत्ति अभी भी अज्ञात है, लेकिन माना जाता है कि ब्रह्मांड का लगभग 95 फीसदी हिस्सा इन्हीं से बना है।