इटावा सफारी में पूंछ कटने के 52 दिन बाद शेरनी राधिका की मौत

इटावा सफारी में पूंछ कटने के 52 दिन बाद शेरनी राधिका की मौत

इटावा, 31 अगस्त। एशियाई शेरों के सबसे बड़े आशियाने के रूप में देश-दुनिया में प्रसिद्ध इटावा सफारी पार्क में पूंछ कटने के बाद बीमार चल रही शेरनी राधिका की सोमवार तड़के करीब 4:30 बजे मौत हो गई। करीब 52 दिनों तक चले उपचार के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।इटावा सफारी पार्क के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने सोमवार को बताया कि राधिका विगत डेढ़ माह से अधिक समय से उपचाराधीन थी। आठ जुलाई को दूसरी शेरनी नीरजा ने राधिका की पूंछ पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इसके बाद सफारी के वन्यजीव चिकित्सकों ने तत्काल उसका उपचार शुरू किया तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा से विशेषज्ञ चिकित्सक को बुलाया गया।

उन्होंने बताया कि संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के चलते विशेषज्ञों की सलाह पर राधिका की क्षतिग्रस्त पूंछ को काटकर अलग करना पड़ा। उपचार के दौरान राधिका ने कई बार अपनी पूंछ को खुद भी काटने का प्रयास किया तथा बार-बार पूंछ पर बैठने के कारण तीन बार टांके भी टूट गए। इसके बावजूद सफारी के वन्यजीव चिकित्सक और कीपर लगातार उसकी निगरानी करते रहे तथा विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उपचार जारी रखा गया।सफारी निदेशक ने बताया कि 27 अगस्त को राधिका की स्वास्थ्य स्थिति नाजुक बताई गई थी। वह भोजन नहीं कर रही थी और केवल पानी तथा बहुत कम मात्रा में चिकन सूप ले रही थी। इसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और वह बेहद कमजोर हो गई। सफारी प्रशासन ने उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन 52 दिनों के अथक प्रयास के बाद सोमवार सुबह करीब 4:30 बजे उसकी मौत हो गई।

डॉ. पटेल ने बताया कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव, उत्तर प्रदेश, लखनऊ को घटना की सूचना देने के बाद उनके निर्देश पर विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों के पैनल से शेरनी का पोस्टमार्टम कराया गया। पैनल की प्रारंभिक रिपोर्ट में अत्यधिक कमजोर होने के कारण मल्टी ऑर्गन फेलियर को मौत की संभावित वजह बताया गया है। शेरनी के पेट और आंतों में काफी मात्रा में हवा और गैस भी पाई गई है।उन्होंने बताया कि मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए विसरा सुरक्षित कर भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों की स्थिति स्पष्ट होगी।

उन्होंने बताया कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव से प्राप्त निर्देश और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही राधिका की पूंछ को छोटा किया गया था, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।गौरतलब है कि शेरनी राधिका को वर्ष 2019 में गुजरात से इटावा सफारी पार्क लाया गया था। शारीरिक अक्षमता और असामान्य व्यवहार के कारण उसे कभी पर्यटकों के लिए सफारी क्षेत्र में प्रदर्शित नहीं किया गया और न ही प्रजनन कार्यक्रम में शामिल किया गया। उसकी उम्र करीब नौ वर्ष थी।

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