
इटावा, 1 सितंबर। उत्तर प्रदेश के इटावा में वृद्धावस्था पेंशन योजना में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बढ़पुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत विचारपुर में 36 वर्षीय महिला उमा देवी पत्नी शिवराज सिंह करीब दस वर्षों से वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर रही थी। शिकायत के बाद समाज कल्याण विभाग की जांच में उसे अपात्र पाया गया, जिसके बाद उसकी पेंशन रोक दी गई।ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार ने महिला के अपात्र होने की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी के माध्यम से जिला समाज कल्याण अधिकारी को लिखित शिकायत की थी। विभाग के अनुसार पिछली 13 अगस्त को मिली शिकायत के बाद वर्ष 2024-25 के वार्षिक सत्यापन में सचिव की रिपोर्ट के आधार पर उमा देवी को अपात्र पाया गया। इसके बाद उसकी वृद्धावस्था पेंशन बंद कर दी गई।
प्रधान प्रतिनिधि का कहना है कि महिला को करीब दस वर्षों तक वृद्धावस्था पेंशन मिलती रही, लेकिन शिकायत के बाद विभाग ने फिलहाल केवल पेंशन रोकने की कार्रवाई की है। उनका आरोप है कि अपात्र रहते हुए प्राप्त की गई पेंशन की धनराशि की वसूली के लिए अभी तक कोई रिकवरी नोटिस या आदेश जारी नहीं किया गया है।वृद्धावस्था पेंशन योजना का उद्देश्य पात्र बुजुर्गों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में 36 वर्षीय महिला को करीब एक दशक तक इस योजना का लाभ मिलना विभागीय सत्यापन व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यह भी जांच का विषय है कि पेंशन स्वीकृत होने के बाद होने वाले वार्षिक सत्यापन में महिला की उम्र और पात्रता की जांच किस स्तर पर की गई।
जिला समाज कल्याण अधिकारी संध्या रानी बघेल ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करते हुए महिला की वृद्धावस्था पेंशन रोक दी गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और यदि जांच में सरकारी धन की वसूली की स्थिति बनती है तो संबंधित महिला से रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।अब जांच में यह स्पष्ट होना है कि महिला ने किन दस्तावेजों के आधार पर वृद्धावस्था पेंशन हासिल की और करीब दस वर्षों तक हुए सत्यापन में उसकी अपात्रता सामने क्यों नहीं आई। यदि जांच में अपात्र व्यक्ति को सरकारी धन के भुगतान की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय करने और धनराशि की वसूली की कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी।
मामले के सामने आने के बाद जिले में वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यह भी जांच का विषय होगा कि कहीं जिले में ऐसे अन्य अपात्र लाभार्थी तो योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं।