
नयी दिल्ली, 05 सितंबर । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि नया भारत युवाओं के बड़े सपनों को साकार करने के लिए उन्हें अनुकूल माहौल एवं अवसर उपलब्ध करा रहा है और जल्द ही देश विनिर्माण, अनुसंधान एवं नवाचार और कृषि निर्यात का वैश्विक केंद्र बनेगा।श्री मोदी ने शनिवार को यहां श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का युवा आज अपना कारोबार शुरू करने, कंपनी को यूनिकॉर्न बनाने, अंतरिक्ष और ड्रोन जैसे क्षेत्रों में काम करने तथा अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधान विकसित करने के सपने देख रहा है। करीब 13 साल पहले के युवाओं के मुकाबले आज के युवाओं के पास इन सपनों को पूरा करने के लिए बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध है।
श्री मोदी ने अपने 2013 के एसआरसीसी संबोधन को याद करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने पानी से आधे भरे गिलास का उदाहरण देते हुए देश की संभावनाओं को सकारात्मक नजरिए से देखने की बात कही थी। आज भारत की स्थिति उस समय के मुकाबले काफी बदल चुकी है और दुनिया भारत की आर्थिक वृद्धि तथा नीतिगत गतिशीलता की चर्चा कर रही है।उन्होंने हाल की 7.8 प्रतिशत तिमाही आर्थिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और व्यापार से जुड़ी चुनौतियों के बीच हासिल हुई यह वृद्धि भारत के सामर्थ्य को दर्शाती है और देश तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रहा है।
श्री मोदी ने जनधन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में करीब 60 करोड़ नये बैंक खाते खोले गये हैं और इससे देश में वित्तीय समावेशन तथा वित्तीय प्रौद्योगिकी क्रांति की मजबूत नींव तैयार हुई है।उन्होंने कहा कि भारत अब बड़ी संख्या में मोबाइल फोन का निर्माण कर रहा है और मोबाइल फोन का निर्यात ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश का रक्षा उत्पादन करीब दो लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात करीब 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भारत विनिर्माण का केंद्र होगा और अनुसंधान एवं नवाचार में भी दुनिया का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि भारत कृषि निर्यात की महाशक्ति बनेगा, देश का अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा और भारत एक दिन ऐसे ओलंपिक का आयोजन करेगा कि दुनिया देखती रह जाएगी।उन्होंने युवाओं से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान करते हुए कहा कि भारतीय परामर्श, लेखा, कानूनी और वित्तीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर अग्रणी क्यों नहीं बन सकतीं। उन्होंने कहा कि भारतीय आज दुनिया की शीर्ष कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं, इसलिए भारतीयों की बनाई कंपनियां भी दुनिया का नेतृत्व कर सकती हैं।
श्री मोदी ने एसआरसीसी के प्रतीक चिह्न में उगते सूरज और समुद्र में आगे बढ़ते जहाज का उल्लेख किया और कहा कि देश को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ना है।