
लखनऊ, 22 सितंबर। उत्तर प्रदेश में कभी डीएलएड (बीटीसी) में दाखिले के लिए मारामारी होती थी और इसी वजह से प्रदेश में खूब निजी कॉलेज खुलते गए। अब स्थिति यह आ गई है कि छात्र न मिलने की वजह से कॉलेज बंद होने जा रहे हैं। प्रदेश में 25 कॉलेजों ने मान्यता वापसी के लिए आवेदन किया है।इस बार दाखिलों के लिए एक बार तारीख भी बढ़ाई गई। उसके बावजूद कुल सीटों के मुकाबले 87 हजार कम आवेदन आए। कुल 2.39 लाख सीटों के मुकाबले 1.52 लाख आवेदन आए हैं। काउंसिलिंग में शामिल होकर विकल्प भरने वालों की संख्या 1.03 लाख रह गई।
विभाग के सूत्रों के मुताबिक माना जा रहा है कि पसंद का कॉलेज न मिलने पर इसमें भी बड़ी संख्या में छात्र दाखिला छोड़ देंगे। यह समस्या इसी साल की नहीं है। साल-दर-साल युवाओं का बीटीसी से मोहभंग हो रहा है। पिछले साल 2.39 लाख सीटों के मुकाबले 1.24 लाख आवेदन आए थे। उससे पहले 2024 में 2.33 सीटों के मुकाबले 3.07 और 2023 में 2.33 सीटों के मुकाबले 3.36 लाख आवेदन आए थे।विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में इस समय कुल 67 सरकारी जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान (डायट) हैं जहां बीटीसी की पढ़ाई होती है। वहीं, 2,974 निजी बीटीसी कॉलेज हैं। अब छात्र न मिलने की वजह से निजी कॉलेज मान्यता वापसी का आवेदन कर रहे हैं। इस साल करीब 25 कॉलेजों ने मान्यता वापसी के लिए आवेदन किया है।
हालांकि अधिकारी का कहना है कि मान्यता वापसी के आवेदनों का पहले परीक्षण किया जाएगा। देखा जाएगा कि कॉलेजों ने अपनी कमेटी से पास करवा कर भेजा है या फिर किसी एक सदस्य या मैनेजर ने। परीक्षण के बाद निदेशक और फिर शासन को भेजा जाएगा। आगे निर्णय वहीं से होना है।सूत्रों की मानें तो बीटीसी में दाखिलों से मोहभंग की कई वजह हैं। बीटीसी कक्षा एक से आठ तक शिक्षक बनने के लिए शैक्षिक अर्हता है। लगातार नए कॉलेज खुलते गए और बड़ी संख्या में लोग बीटीसी कर चुके हैं, लेकिन छह साल से बेसिक शिक्षकों की कोई नई भर्ती ही नहीं हुई है। पिछले 10 साल में 69,000 शिक्षक भर्ती और 68,500 शिक्षक भर्ती हुई हैं। ये भी शिक्षा मित्रों को रिटर्न करने पर उनकी जगह सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर करवाई गई थीं।
यही वजह है कि बीटीसी दाखिले से युवाओं का मोहभंग हो रहा है। पिछले साल कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण दाखिले ही दिसंबर में हुए थे। इंतजार करते-करते छात्रों ने दूसरे कोर्स में दाखिला ले लिया। इस साल बीएड के साथ ही बीटीसी दाखिले शुरू हो गए, लेकिन बीटीसी में स्नातक अंतिम वर्ष के अभ्यर्थियों को मौका नहीं दिया गया। तब तक कई विश्वविद्यालयों का रिजल्ट ही नहीं आया। इससे आवेदन और कम हुए।इस बारे में स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय त्रिवेदी का कहना है कि भविष्य न होना ही बीटीसी में दाखिले न होने की मुख्य वजह है। यह भी जरूरी है कि सही समय पर सत्र शुरू हो और सही समय पर परीक्षाएं हों।