अर्थव्यवस्था में निजी निवेश गति पकड़ रहा है, सरकारी काम में लेट-लतीफी की पुरानी धारणा बदल रही है: सीतारमण

अर्थव्यवस्था में निजी निवेश गति पकड़ रहा है, सरकारी काम में लेट-लतीफी की पुरानी धारणा बदल रही है: सीतारमण

नयी दिल्ली, 22 सितंबर । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि अर्थव्यवस्था में इस समय निजी क्षेत्र के निवेश में बढ़ोतरी स्पष्ट रूप से दिख रही है तथा सरकारी कामकाज की आज की गति ने उस पुरानी धारणा को बदल दिया है कि प्रशासनिक काम है तो देरी होगी ही।श्रीमती सीतारमण यहां प्रबंधन क्षेत्र के शीर्ष संस्थान -आल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (एआईएमए) के 53वें अखिल भारतीय प्रबंधन सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का अनुमानित पूंजीगत व्यय 2026-27 में बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक कर दिया गया है। प्रभावी पूंजीगत व्यय, जिसमें राज्यों को पूंजीगत परिसंपत्तियां बनाने के लिए केंद्र द्वारा दिए जाने वाले अनुदान भी शामिल हैं, 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।श्रीमती सीतारमण ने कहा, ” सरकार ने निजी निवेश को प्रोत्साहित करने और आकर्षित करने के उद्देश्य से सार्वजनिक पूंजीगत व्यय का रणनीतिक रूप से इस्तेमाल किया है और इसके परिणामस्वरूप निजी निवेश में बढ़ोतरी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।” उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 34 प्रतिशत से अधिक हो गया। इसमें वास्तविक रूप से लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि विनिर्माण क्षेत्र में क्षमता उपयोग बढ़कर 75 प्रतिशत हो गया है।

उन्होंने कहा कि कारोबार को इस परिचालन गति को दोहरी (बैंकों और कंपनियों की) बैलेंस शीट की समस्या (बैंक का कर्ज न चुका पाने वाली कंपनियों को बैंकों से कर्ज पर कर्ज मिलने की समस्या ) के समाधान से बल मिला है। उन्होंने कहा, ” आज भारत दोहरी बैलेंस शीट के लाभ की स्थिति में है—वाणिज्यिक बैंकों के पास ऋण देने के लिए पर्याप्त तरलता है और कंपनियों की वित्तीय स्थिति निवेश करने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत है।”वित्त मंत्री ने कहा कि उद्योग क्षेत्र के लिए बैंक ऋण की वृद्धि में भी तेजी आई है। इस वर्ष जून में बैंकों के कर्ज कारोबार में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ऋण उन लोगों और क्षेत्रों तक पहुंच रहा है जिन्हें इसकी आवश्यकता है।

श्रीमती सीतारमण ने कहा कि दूसरे देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते (विभिन्न एफटीए) भारत की श्रम-प्रधान वस्तुओं और सेवाओं के लिए नए बाजारों के द्वार खोल रहे हैं। उन्होंने वाणिज्यिक क्षेत्र को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।श्रीमती सीतारमण ने इस सम्मेलन के विषय- ‘भविष्य के लिए परिवर्तन: दृढता के साथ वृद्धि’ पर अपने संबोधन में सरकार के विभिन्न क्षेत्रों में काम की गति में तेजी का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रमुख बंदरगाहों पर जहाजों में प्रवेश व निकास का समय एक दशक में लगभग आधा हो गया है, रेल नेटवर्क अब लगभग पूरी तरह विद्युतीकृत हो चुका है और माल ढुलाई बढ़कर रिकॉर्ड 1,67 करोड़ टन तक पहुंच गई है तथा डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से अगस्त 2026 में प्रतिदिन औसतन लगभग 79 करोड़ लेन-देन हुए।

उन्होंने कहा कि राज्य निवेश आकर्षित करने के लिए एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और इस प्रतिस्पर्धा के परिणामस्वरूप उच्च-मूल्य वाली गतिविधियां कोयंबटूर, वडोदरा, विशाखापत्तनम, इंदौर, भुवनेश्वर और जयपुर जैसे टियर-2 और टियर-3 केंद्रों तक फैल रही हैं। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 भी इसी मॉडल पर आधारित है, जिसमें केंद्र द्वारा तैयार किए गए ढांचे के साथ राज्यों द्वारा प्रभावी क्रियान्वयन को जोड़ा गया है।उन्होंने कहा कि जुलाई 2024 में सत्ता में लौटने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने अपने पहले बजट में सुधारों और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया, जिससे अंततः रोज़गार और आजीविका के अवसर बढ़ते हैं। इससे हमें विकास और मज़बूती मिल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहली बार नौकरी देने पर प्रोत्साहन दिया, नियोक्ताओं के रिटायरमेंट योगदान का कुछ हिस्सा भरा और कॉर्पोरेट इंटर्नशिप शुरू की – ये सभी ‘रोज़गार-जुड़े प्रोत्साहन’ (ईएलआई) योजनाओं के तहत किए गए।

वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में आय कर की दरों में कटौती की गई और स्लैब का दायरा बढ़ाया गया, जिससे खर्च करने योग्य आय और कुल मांग में बढ़ोतरी हुई। हमारा लक्ष्य सिर्फ़ अपनाना नहीं, बल्कि नेतृत्व करना होना चाहिए। उन्होंने प्रबंधन क्षेत्र को लोगों से नयी सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा, ” दशकों से हमने ‘काइज़ेन’ से लेकर ‘लीन मैन्युफैक्चरिंग’ तक दूसरी जगहों पर विकसित प्रबंधन के तरीकों से सीखा है। अगला कदम अपने यहाँ प्रबंध के ऐसे तरीके बनाने हैं जिनका दुनिया अध्ययन करे और ऐसे मानक स्थापित करने हैं जो वैश्विक नियम बन जाएं।”वित्त मंत्री ने कहा , ”इसके लिए लगातार कोशिशों की ज़रूरत होगी। एक देश के तौर पर हम पूरी तरह सक्षम हैं; हमें खुद पर भरोसा रखना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।” उन्होंने कहा कि आज के मैनेजरों को भू राजनीतिक कारमणों से आपूर्ति की कड़ियों के लिए खतरों , जलवायु जोखिम, व्यवहार विज्ञान, डेटा और विनियामकीय तथा तकनीक-आधारित परियोजना प्रबंधन के बारे में गहरी समझ की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि इसके मद्देनजर एक आईएमए को पूरे उद्योग में पाठ्यक्रम में सुधार की पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ” हमें ऐसे लीडर तैयार करने होंगे जो अलग-अलग विभागों में काम करने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों को आपस में जोड़ सकें। जब हम 2047 तक ‘विकसित भारत’ की दिशा में काम कर रहे हैं, तो भारतीय प्रबंधन पद्धतियों का योगदान आज हमारे द्वारा बनाए गए उद्यमों और संस्थानों की गुणवत्ता से मापा जाएगा।”

उन्होंने कहा कि जरूरत न केवल बड़ी कंपनियाँ बनाने की है , कंपनियाँ को बेहतर भी बनाना है ताकि वे प्रतिस्पर्धी, नवाचार की राह में आगे चलने वाली हो, भरोसेमंद और मज़बूत हों और आने वाले दशकों में भारत का नेतृत्व कर सकें।श्रीमती सीतारमण ने जीएसटी में सितंबर 2025 में किये गये सुधारों का जिक्र किया तथा इस बार के बजट में प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में और निश्चितता लाने के उपायों का उल्लेख किया। वित्त मंत्री ने राज्यों को ‘राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता’ योजना के ज़रिए 50 साल के लिए बिना ब्याज वाले ऋण की योजना का जिक्र भी किया जिसका कुछ हिस्सा सुधारों से जुड़ा है।

केंद्र ने कई नई योजनाएँ राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा (‘चैलेंज’) के आधार पर शुरू करने की रणनीति अपनायी है ताकि राज्य अपनी खूबियों का इस्तेमाल करें और अपने सबसे अच्छे प्रस्ताव सामने लाएँ।उन्होंने यह भी कहा , ”अगले 20 सालों में चुनौती सिर्फ़ और ज़्यादा स्टार्टअप बनाने की नहीं है। चुनौती यह देखने की है कि आज के कितने स्टार्टअप बड़ी, पेशेवर तरीके से चलने वाली और लंबे समय तक टिकने वाली कंपनियाँ बन सकती हैं। ‘ उन्होंने कहा कि एआईएमए के लोग और कंपनी जगत की हस्तियां इन स्टार्टअप इकाइयों को संस्थापक के नेतृत्व वाले उद्यम से संस्थात नेतृत्व वाली कंपनियों में बदलने के मुश्किल बदलाव में मदद कर सकते हैं — और ऐसा करते समय वे उस उद्यमशीलता की ऊर्जा (उद्यमी ऊर्जा) को भी बनाए रख सकते हैं, जिसकी वजह से ये कंपनियाँ शुरू हुई थीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Designed and Developed by Prakhar Dixit