
गोरखपुर, 23 सितंबर। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सामान्य जीवन में व्यक्ति यह तय नहीं कर पाता है कि सत्य क्या है और असत्य क्या है।योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज की 57वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज की 12वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में बुधवार को श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ अवसर पर कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने सत्य और असत्य के बीच एक नया तथ्य प्रस्तुत कर दिया है, अर्धसत्य का, जो कभी सत्य नहीं होता। ऐसी स्थितियों में पूरी दुनिया की मानवता अवसाद की शिकार है, उसके सामने चुनौती है।
उन्होंने कहा कि आज विज्ञान भले ही कितना ही आगे बढ़ चुका हो, मगर जीवन में स्थायी शांति के लिए विश्व की मानवता केवल भारत भूमि को ही देखती है। भारत भूमि पर पावन कथाओं की परंपरा कठिन चुनौतियों में व्यक्ति का मार्ग सुगम बनाने के लिए मार्गदर्शन करती है।उन्होंने कहा कि पवित्र कथाओं के वाचन और श्रवण की परंपरा, हजारों वर्षों की विरासत को समझने का भी अवसर होती है।मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में जब आचरण और विचार के बीच साम्यता प्रभावकारी होती है। व्यक्ति जब मनसा, वाचा, कर्मणा से एक दिशा में चलता है तो उसे सफलता प्राप्त होती है। मन, वचन और कर्म में एकरूपता न रहने पर भ्रम की स्थिति पैदा होती है। क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसे लेकर भ्रम पैदा होने पर ‘न घर का, न घाट का’ वाली स्थिति बन जाती है। श्रीमद्भागवत की कथा मनुष्य के इसी भ्रम को दूर करती है।
इस अवसर पर कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास का गोरक्षपीठ में स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण के वाचन और श्रवण की परंपरा पांच हजार वर्ष पुरानी है। भारत का श्रद्धालु इस कथा के माध्यम से ज्ञान, भक्ति व निष्काम कर्म की प्रेरणा प्राप्त करता है। जीवन के उद्देश्य व रहस्यों को समझने के लिए यह कथा अत्यंत महत्वपूर्ण है। पांच हजार वर्ष पहले शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को इस कथा का श्रवण कराया, तबसे एक लंबा कालखंड बीत गया। सनातन संस्कृति ने सम-विषम परिस्थितियों सहित तमाम चुनौतियों का सामना किया। उत्थान-पतन की कहानियों के बीच भी यह कथा हम सबकी स्मृतियों में बची रही। यह कथा जीवन की वास्तविकता का एहसास करते हुए अज्ञानता से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।मुख्यमंत्री के संबोधन के उपरांत व्यासपीठ पर विराजमान कथा व्यास, वृंदावन से पधारे मलूकपीठाधीश्वर श्रीमदजगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्रदास ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया।