
लखनऊ, 13 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए दावा किया कि प्रदेश में असदुद्दीन ओवैसी की बढ़ती सक्रियता से सपा के पारंपरिक मुस्लिम जनाधार पर असर पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि ओवैसी की रैलियों में उमड़ रही भीड़ को देखते हुए सपा गठबंधन के राजनीतिक नफा-नुकसान का आकलन करने के लिए गोपनीय सर्वे करा रही है। राजभर ने दावा किया कि मुस्लिम समाज अब सपा से राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग कर रहा है। उनके मुताबिक, लंबे समय से सपा का समर्थन करने वाले मुस्लिम मतदाताओं के बीच अब दूसरे राजनीतिक विकल्पों को लेकर भी चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा को पहले की तरह एकमुश्त मुस्लिम समर्थन मिलने की संभावना नहीं है।
श्री राजभर ने कहा कि ओवैसी ने पहले सपा के साथ गठबंधन का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उस समय पार्टी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब ओवैसी की सक्रियता बढ़ने के बाद सपा इस मुद्दे पर नए सिरे से विचार कर रही है। हालांकि, सपा द्वारा गोपनीय सर्वे कराए जाने का दावा राजभर का है।उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन राज्यों में ओवैसी की पार्टी चुनाव लड़ती है, वहां मुस्लिम मतदाताओं का एक हिस्सा उसकी ओर जा सकता है। राजभर के अनुसार, उत्तर प्रदेश में भी इसका असर सपा के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
सुभासपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सपा ने मुस्लिम समाज को पर्याप्त राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के लोग पार्टी के लिए काम करते रहे हैं, लेकिन नेतृत्व और सत्ता में उनकी भागीदारी को लेकर अपेक्षित चर्चा नहीं हुई। राजभर ने सवाल उठाया कि यदि मुस्लिम समाज सपा को लगातार समर्थन देता रहा है, तो पार्टी में उसके राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नेतृत्व को लेकर मांग क्यों नहीं उठती।उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सरकारी नौकरियों के साथ सत्ता में भागीदारी के मुद्दों पर भी अपनी आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ओवैसी इसी राजनीतिक हिस्सेदारी का सवाल उठा रहे हैं। राजभर के मुताबिक, मुस्लिम मतदाताओं के सामने अब सपा के अलावा ओवैसी की एआईएमआईएम और पीस पार्टी जैसे विकल्प भी मौजूद हैं।
श्री राजभर ने आजमगढ़ का जिक्र करते हुए दावा किया कि पिछले चुनाव में प्रचार के बिना भी ओवैसी को वहां करीब तीन प्रतिशत मत मिले थे। उन्होंने कहा कि इस बार ओवैसी पहले से सक्रिय हैं और इसका असर सपा पर पड़ सकता है। राजभर ने बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि ओवैसी की राजनीतिक सक्रियता को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भी सपा को इसका सामना करना पड़ सकता है।उन्होने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा को मुस्लिम मतदाताओं का एकमुश्त समर्थन मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए दावा किया कि मुस्लिम समाज में सपा को लेकर नाराजगी है और आगामी चुनाव में पार्टी को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा की जो राजनीतिक साख बची थी, वह भी 2027 में समाप्त हो सकती है। हालांकि, मुस्लिम मतदाताओं के रुख और आगामी चुनाव के नतीजों को लेकर राजभर के ये दावे राजनीतिक आकलन हैं, जिनकी पुष्टि चुनाव परिणामों से ही होगी।