
लखनऊ, 23 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में आयोजित होने वाला दसवां दीपोत्सव भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और जनआस्था का भव्य उत्सव होगा।उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2017 में शुरू हुई दीपोत्सव की यात्रा आज वैश्विक पहचान प्राप्त कर चुकी है। इस वर्ष आयोजन के एक दशक पूरे होने पर राम की पैड़ी सहित संपूर्ण अवधपुरी को लाखों दीपों से आलोकित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को आगामी सात नवंबर को आयोजित होने वाले दीपोत्सव, 26 अक्टूबर को प्रस्तावित महर्षि वाल्मीकि जयंती और चित्रकूट के रामघाट के विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी तैयारियां समयबद्ध ढंग से पूरी करने तथा धार्मिक गरिमा, सांस्कृतिक परंपरा और आयोजन की भव्यता के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। श्रद्धालुओं और अतिथियों की सुविधा, सुरक्षा, सुगम आवागमन, प्रकाश, स्वच्छता और मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान देने को कहा।बैठक में अपर मुख्य सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति ने मुख्यमंत्री को बताया कि दीपोत्सव का आयोजन तीन प्रमुख चरणों में होगा। पहले चरण में साकेत महाविद्यालय से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें रामायण के प्रसंगों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों को प्रदर्शित किया जाएगा। दूसरे चरण में रामकथा पार्क में भगवान श्रीराम और माता सीता के स्वरूपों का प्रतीकात्मक आगमन, भरत मिलाप और श्रीराम के राज्याभिषेक से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे।
तीसरे चरण में सरयू आरती, दीप प्रज्ज्वलन, राम की पैड़ी पर 200 कलाकारों की प्रस्तुतियां, 2,100 स्वदेशी ड्रोनों का रामायण आधारित आकाशीय शो, लेजर प्रस्तुति, गोंडा पुल के समीप हरित आतिशबाजी और अंतरराष्ट्रीय रामलीलाओं का मंचन होगा। आयोजन में लगभग 35 हजार स्वयंसेवक भाग लेंगे। सरयू आरती में 2,147 प्रतिभागियों की सहभागिता प्रस्तावित है। इसके अलावा 3डी प्रोजेक्शन और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र होंगे। डिजिटल माध्यमों से दीपोत्सव को पांच करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।समीक्षा बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, असम, राजस्थान, बिहार, केरल, गोवा और तेलंगाना के लगभग एक हजार कलाकार लोककलाओं और नृत्य परंपराओं की प्रस्तुतियां देंगे।
आयोजन में 12 देशों के सांस्कृतिक प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है। भारत में तैनात विदेशी राजदूतों और विदेशों में तैनात भारतीय राजनयिकों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के पदाधिकारियों और अयोध्या के संतों के साथ समन्वय स्थापित कर तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों का सहयोग लेने पर भी जोर दिया।मुख्यमंत्री ने 26 अक्टूबर को प्रस्तावित महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों में मंदिरों में वाल्मीकि रामायण का अखंड पाठ कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही रामायण आधारित प्रस्तुतियां और चित्रकला गतिविधियां आयोजित करने को कहा, ताकि भगवान श्रीराम के आदर्शों और महर्षि वाल्मीकि के योगदान को जन-जन तक पहुंचाया जा सके।
बैठक में चित्रकूट स्थित रामघाट के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने हाल में अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का प्राथमिकता के आधार पर पुनर्विकास कराने के निर्देश दिए। उन्होंने दुकानों के व्यवस्थित पुनर्वास, नालों के सुदृढ़ीकरण और तुलसी चबूतरे के विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने को कहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रामघाट के विकास में स्थानीय धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व और जनभावनाओं का पूरा ध्यान रखा जाए। साथ ही, भविष्य में बाढ़ की आशंका और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाये।