वायुसेना प्रमुख के साथ उड़ान भरने वाली देश की पहली एनसीसी कैडेट बनीं तेजस्वी रेड्डी

वायुसेना प्रमुख के साथ उड़ान भरने वाली देश की पहली एनसीसी कैडेट बनीं तेजस्वी रेड्डी

नयी दिल्ली, 23अक्टूबर । हैदराबाद की इंजीनियरिंग की अंतिम वर्ष की छात्रा जक्कुला तेजस्वी रेड्डी सेवारत वायुसेना प्रमुख के साथ उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) कैडेट बन गयी हैं।कैडेट तेजस्वी ने मंगलवार को डुंडीगल स्थित वायुसेना अकादमी में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के साथ किरण विमान में 35 से 40 मिनट की उड़ान भरी। तेजस्वी का सपना वायुसेना में लड़ाकू विमान पायलट बनने का है।

तेजस्वी ने गणतंत्र दिवस शिविर 2026 के दौरान यहां वायुसेना प्रमुख के साथ मुलाकात में उनके साथ उड़ान भरने की इच्छा जतायी थी। उस समय उन्हें यह सपना लगभग असंभव लगा था। लेकिन कुछ महीनों बाद उनकी यह इच्छा पूरी हो गयी। तेजस्वी ने बताया कि उन्हें 19 अक्टूबर को उड़ान के बारे में जानकारी मिली थी। वह चाहती थीं कि मौसम ठीक रहे और किसी वजह से उड़ान रद्द न हो।उड़ान से पहले तेजस्वी को विमान के कॉकपिट की जानकारी दी गयी। उन्होंने सुरक्षा संबंधी निर्देशों, विमान से आपात स्थिति में बाहर निकलने की प्रक्रिया के प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया पूरी की। वायुसेना प्रमुख ने उन्हें विमान के हिस्सों, इंजन, कॉकपिट में काम करने के तरीके और सुरक्षा प्रणालियों के बारे में भी बताया।

तेजस्वी पहले एनसीसी के माइक्रोलाइट विमानों में तीन बार उड़ान भर चुकी थीं। इस बार उन्हें वायुसेना प्रमुख की देखरेख में कुछ समय के लिए किरण विमान का नियंत्रण संभालने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि वायुसेना प्रमुख ने उन्हें एक बादल की ओर विमान ले जाने को कहा और कुछ समय के लिए विमान का नियंत्रण उन्हें सौंपा।वायुसेना प्रमुख ने तेजस्वी से कहा कि यह अवसर केवल उनकी किस्मत से नहीं मिला, बल्कि उनकी मेहनत का नतीजा है। एनसीसी निदेशालय ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें संगठन का प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया।

तेजस्वी अपने परिवार की पहली सदस्य हैं, जिन्होंने एनसीसी की वायु शाखा में प्रवेश लिया। उनका कहना है कि एनसीसी ने उन्हें अनुशासन सिखाया और लड़ाकू विमान की पायलट बनने का लक्ष्य दिया। वह गणतंत्र दिवस शिविर 2026 में शामिल होने के साथ प्रधानमंत्री की रैली में भी हिस्सा ले चुकी हैं। उन्होंने युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम की श्रेणी में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना निदेशालय का प्रतिनिधित्व भी किया है।तेजस्वी के पिता एक निजी कंपनी में काम करते हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। दोनों ने उन्हें अपनी पसंद के अनुसार तीनों सेनाओं में से किसी में भी करियर चुनने की स्वतंत्रता दी है। तेजस्वी का कहना है कि देश की सेवा करना बड़ी जिम्मेदारी है और जिन युवाओं में देश की सेवा करने की क्षमता और सच्ची इच्छा है, उन्हें आगे आना चाहिए।

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