
नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सर्दी से पहले दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने और सर्दियों की तैयारियों के संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार तथा शहरी निकायों की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की है।मंत्रालय के सचिव नरेंद्र भूषण ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों और शहरी निकायों के साथ कार्ययोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण, बिजली तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड, उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, मुजफ्फरनगर और शामली के जिलाधिकारियों एवं नगर आयुक्तों ने भाग लिया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक उठाये गये 11 प्रमुख कदमों और आगे की योजनाओं की जानकारी दी। इनमें सड़कों की धूल, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों, कचरा और पराली जलाने, वाहनों तथा उद्योगों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और यातायात जाम दूर करने के उपाय शामिल हैं।समीक्षा के दौरान सड़कों के सुधार, जाम वाले स्थानों पर यातायात प्रबंधन, इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग केंद्रों की स्थापना, ठोस कचरे के प्रसंस्करण तथा पुराने कचरा स्थलों के निस्तारण पर चर्चा हुई। श्री भूषण ने पुराने ट्रकों और बसों को बदलने की ‘परिवर्तन’ योजना में तेजी लाने, ईंधन केंद्रों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरे लगाने और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बिना ईंधन नहीं देने की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया।
उन्होंने निर्माण स्थलों और कचरा ढोने वाले वाहनों की डिजिटल निगरानी, सड़कों की यांत्रिक सफाई तथा उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने और संशोधित उत्सर्जन मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने शहरी निकायों को नगर वन योजना के तहत ‘नमो वन’ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया।