
कानपुर, 24 अक्टूबर । हृदय रोगों की रोकथाम पर केंद्रित सम्मेलन ‘कार्डियोप्रिवेंट-2026’ शनिवार को मंधना-बैराज रोड स्थित होटल इटर्निटी में आयोजित किया गया। कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) के उत्तर प्रदेश चैप्टर के तत्वावधान में एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी के हृदय रोग विभाग की ओर से आयोजित सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के अलावा जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, मध्य प्रदेश और झारखंड से आए हृदय रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।सम्मेलन का उद्घाटन सीएसआई के अध्यक्ष-निर्वाचित प्रो. सत्येन्द्र तिवारी और एलपीएस संस्थान के निदेशक प्रो. राकेश कुमार वर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया। आयोजन अध्यक्ष एवं सीएसआई यूपी चैप्टर के अध्यक्ष प्रो. उमेश्वर पाण्डेय ने बताया कि कानपुर के मूल निवासी और एलपीएस संस्थान के पूर्व छात्र प्रो. तिवारी बेंगलुरु में होने वाले सीएसआईकॉन-2026 में सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभालेंगे। वह इस पद पर पहुंचने वाले उत्तर प्रदेश के पहले हृदय रोग विशेषज्ञ होंगे।
प्रो. पाण्डेय ने कहा कि हृदय रोग भारत में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं और पश्चिमी देशों की तुलना में यहां कम उम्र में दिल का दौरा पड़ने की समस्या अधिक चिंता का विषय है। उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह के कई मरीजों की समय पर पहचान नहीं हो पाती और न ही उनका समुचित उपचार या बीमारी पर नियंत्रण हो पाता है। उन्होंने कहा कि समस्या जानकारी की कमी नहीं, बल्कि उपलब्ध जानकारी और दिशानिर्देशों को व्यवहार में लागू करने की है।उन्होंने कहा, “सबसे अच्छा स्टेंट वही है, जिसकी कभी जरूरत ही न पड़े।” आचार्य चरक के सूत्र ‘स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनम्’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चिकित्सा में स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि हृदय रोगों की रोकथाम सम्मेलन कक्षों तक सीमित न रहकर प्रदेश के हर जिले में रोजमर्रा के उपचार का हिस्सा बनेगी।
सम्मेलन में प्रो. उमेश्वर पाण्डेय द्वारा लिखित दो पुस्तकों ‘बेडसाइड कार्डियोलॉजी: कम्प्लीट कार्डियोलॉजी एग्जाम कम्पैनियन’ और ‘क्लिनिकल कार्डियोलॉजी: फ्रॉम द बेडसाइड टू द इको रिपोर्ट’ का विमोचन किया गया। पहली पुस्तक कार्डियोलॉजी की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शिका है, जबकि दूसरी मरीज की जांच से लेकर इको रिपोर्ट तक हृदय रोगों की क्लिनिकल समझ विकसित करने पर केंद्रित है। प्रो. पाण्डेय ने बताया कि दोनों पुस्तकें उनके वर्षों के शिक्षण और चिकित्सकीय अनुभव पर आधारित हैं।नौ वैज्ञानिक सत्रों में 34 व्याख्यानों के दौरान युवाओं में समय से पहले हार्ट अटैक, मोटापा, उच्च रक्तचाप, नमक का सेवन, नींद और खर्राटे, वायु प्रदूषण का हृदय पर असर, महिलाओं में हृदय रोग, बच्चों में जन्मजात हृदय रोगों की रोकथाम, जिम और मैराथन के दौरान अचानक मौत, कार्डियक रिहैबिलिटेशन तथा हृदय रोगों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर चर्चा हुई। प्रो. तिवारी ने कोलेस्ट्रॉल से जुड़े लाइपोप्रोटीन (ए) के हृदय पर गंभीर प्रभावों पर व्याख्यान दिया।
‘140/90 सामान्य नहीं’ विषय पर अपने व्याख्यान में प्रो. पाण्डेय ने कहा कि रक्तचाप का खतरा 140/90 पर अचानक शुरू नहीं होता, बल्कि इससे पहले ही बढ़ने लगता है। उन्होंने 130/80 से अधिक रक्तचाप को गंभीरता से लेने और नियमित निगरानी पर जोर दिया।विशेषज्ञों ने लोगों को रक्तचाप 130/80 या उससे अधिक होने पर डॉक्टर से सलाह लेने, प्रतिदिन पांच ग्राम से कम नमक का सेवन करने, अचार-पापड़ और नमकीन जैसे खाद्य पदार्थों में मौजूद अतिरिक्त नमक से सावधान रहने तथा सप्ताह में कम से कम 150 मिनट तेज चलने या व्यायाम करने की सलाह दी। उन्होंने घर पर नियमित रूप से रक्तचाप की जांच करने और परिवार में किसी सदस्य को कम उम्र में हार्ट अटैक होने पर अन्य सदस्यों की भी जांच कराने पर जोर दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, रक्तचाप, शुगर और कोलेस्ट्रॉल बिना लक्षणों के भी बढ़ सकते हैं, इसलिए समय-समय पर इनकी जांच करानी चाहिए।
सम्मेलन के आयोजन सचिव प्रो. अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि प्रत्येक सत्र के अंत में विशेषज्ञों के बीच खुली चर्चा रखी गई, ताकि चिकित्सक व्यावहारिक जानकारी लेकर लौटें और उसका लाभ मरीजों को मिल सके। इस अवसर पर सीएसआई यूपी चैप्टर की मानद सचिव प्रो. रूपाली खन्ना, सह-अध्यक्ष डॉ. संतोष सिन्हा, संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. एम.एम. रज़ी, कोषाध्यक्ष डॉ. मोहित सचान, वैज्ञानिक समिति के अध्यक्ष डॉ. मुकेश झा तथा सह-अध्यक्ष डॉ. कुमार हिमांशु और डॉ. प्रवीण शुक्ला सहित बड़ी संख्या में हृदय रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक और रेजिडेंट डॉक्टर मौजूद रहे।